कैसे इंद्रावती नदी हुई मिचनार से दूर, क्यूँ पड़ा पहाड़ का नाम मगर पकना, जानिए लोक कथाओं से...

महादेव कश्यप पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बने रहने वाले मिचनार के प्रसिद्ध मंदिर के पुजारी हैं जो कि ग्राम पंचायत- मिचनार नं. 1, ब्लॉक- लोहांडीगुड़ा, जिला- बस्तर, छत्तीसगढ़ में रहते हैं। वे मिचनार के मगर पकना पहाड़ और इंद्रावती नदी से जुड़ी लोक कथा बता रहे हैं। राजा राहूण, जिनको आदिवासी देवों के राजा मानते हैं, की सभा पहाड़ पे लगती थी। मान्यता है कि जब कालाहांडी से इंद्रावती नदी का उद्गम हुआ, तो एक दैवीय मगर नदी को मिचनार के तरफ दिशा दे रहा था। राजा राहूण की सभा ने यह निर्णय किया की नदी को वहाँ आने से रोकना होगा ताकि तहस नहस होने से बचाया जा सके। राजा राहूण के निर्देश पे उनके सिपाही ने उस दैवीय मगर का वध कर के नदी का रुख मोड़ दिया। इसी कारण आज इंद्रावती नदी मिचनार से ना हो के चित्रकोट से बहती है। और भी कई रोचक कथाएँ सुना रहे हैं महादेव जी...

Posted on: Oct 25, 2021. Tags: CHITRAKOT DEITY FOLKLORE GOD INDRAVATI KALAHANDI MICHNAR

हमारे गांव में हैंडपंप खराब है, लोग 500 मी. दूर नाला से पानी लाते है, कृपया मदद करें...

ग्राम पंचायत- मिचनार, ब्लॉक- लोहांडीगुड़ा, जिला- बस्तर, छत्तीसगढ़ से मानबोध सोड़ी बता रहे हैं कि कासपारा में हैंडपंप खराब है। लोग अभी 500 मी. दूर नाला से पानी लाते हैं। इसके लिए इन्होंने आवेदन भी दिया था लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। कृपया दिए गए नंबरों में बात करके समस्या का समाधान कराने में मदद करें। संपर्क नंबर- 6268803746, कलेक्टर- 8458956694, सीईओ- 8889251366

Posted on: Oct 18, 2021. Tags: BASTAR CG HANDPUMP LOHANDIGUDA MANBODH SODI MICHNAR PROBLEM WATER

हमारे गांव में 500 मी. रोड नहीं बना है, आने जाने में परेशानी होती है, कृपया मदद करे...

कासपारा, ग्राम पंचायत- मिचनार, ब्लॉक- लोहांडीगुड़ा, जिला- बस्तर, छत्तीसगढ़ से मानबोध सोड़ी बता रहे हैं कि उनके पारा में 500 मी. रोड नहीं बना है। बरसात के समय आने जाने में बहुत परेशानी होती है। कृपया दिए गए नंबरों में बात कर के इनकी समस्या का समाधान कराने में मदद करें। CEO- 8889251366, कलेक्टर- 8458956694, पीड़ित व्यक्ति- 6268803746

Posted on: Oct 06, 2021. Tags: BASTAR CG LOHANDIGUDA MANBODH SODI MICHNAR PROBLEM ROAD

धान और श्रम का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल और प्रतिदान आज भी सुदूर इलाकों में जीवित...

कासपारा, ग्राम पंचायत- मिचनार न. 1, ब्लॉक- लोहांडीगुड़ा, जिला- बस्तर, छत्तीसगढ़ से मोटूराम सोड़ी बता रहे हैं कि कैसे सुदूर इलाकों में लोग आज भी धान और श्रम को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण इलाकों में वजन का मापदंड होता है एक औसत आकार का डब्बा, जिसे कि पहली कहा जाता है। धान कटाई के बाद लोग आधी उपज सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पे बेचने के बाद बचे हुए आधे उपज को अपने घरों में बैंक की तरह रखते हैं। साल में जब जितनी आवश्यकता हो, वे उतना धान दुकान में बेच कर अपनी जरूरत पूरी करते हैं। खेती के समय दूसरों को श्रम के एवज में भुगतान पैसे, धान व प्रतिदान श्रम के रूप में किया जाता है। संपर्क नंबर@7587498298

Posted on: Oct 05, 2021. Tags: AGRICULTURE BASTAR CG CURRENCY FARMING LABOUR LOHANDIGUDA MICHNAR MOTURAM SODI

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