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जागा जागा रे आदिवासी भाई बहन माँ...जागरूकता गीत

ग्राम-तिकाड़ी पोस्ट-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से शांति तिर्की एक जागरूकता गीत सुना रही है:
जागा जागा रे आदिवासी भाई बहन माँ-
सामाज की सेवा में जागो-
मेरे भाई जागो मेरी बहनो-
रे जागो रे जागो जाग उठो मेरे जावानो जागो-

रे जगा रे जागो जाग उठो मेरे युवतियों
दलित की सेवा में जागो मेरे जावानो जागो मेरी युवतियों-
जागो रे जागो जाग उठो मेरे जावानो-
जागो रे जागो जाग उठो मेरी युवतियों...

Posted on: Jun 21, 2018. Tags: SHANTI TIRKI

शिवा गुरु बिना जिन्दगी वीरान ये जीवन बीत रहा...भजन गीत

ग्राम-अलका, थाना-चलगली, तहसील-वाड्रफनगर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से सुरेश कुमार पोया एक भजन गीत सुना रहे हैं:
शिवा गुरु बिना जिन्दगी वीरान ये जीवन बीत रहा-
ये सुखी कामेश्वर दे तुझे गले लगाना दुःख हो तो कोई ना आवे-
शिवा गुरु बिना जिन्दगी वीरान ये जीवन बीत रहा-
माता पिता भाई और बहना माने गा नही तेरा कहना-
भईया हरीन्द्र आन्दन गोसाई कहे हो तुम भाई भाई-
शिवा गुरु बिना जिन्दगी वीरान ये जीवन बीत रहा...

Posted on: Jun 21, 2018. Tags: SURESH KUMAR POYA

एक साल पहले हम पूरे गाँव के लोगों ने मनरेगा में एक हफ्ते काम किया था, पैसा नहीं मिला...

आश्रित ग्राम-कनाखेरों, ग्राम पंचायत-कांदावानी, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से जयसिंह बैंगा बता रहे है कि मनरेगा के तहत कुआँ निर्माण में काम किये थे 1 साल हो गया उसका पैसा नही मिला है. यह काम सचिव सरपंच के द्वारा करवाया गया था लोग 1 सप्ताह काम किये थे पूरा गांव के लोगो ने किया था उसके लिए सचिव सरपंच को बोलने से भी कोई ध्यान नही देते है| वे सीजीनेट सुनने वाले संथियो से अपील कर रहे हैं कि दिए गए नंबरों पर अधिकारियों से बात कर भुगतान करवाने में मदद करें, जिससे उन्हें मदद होगी: सचिव@9406066611. मिथलेश मानिकपुरी@8964973228.

Posted on: Jun 21, 2018. Tags: JAISINGH BAIGA KABIRDHAM

लंबी सड़क चले आना रे, सबको सलाम कर आना रे...गीत-

जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से निर्मला एक गीत सुना रही हैं:
लंबी सड़क चले आना रे, सबको सलाम कर आना रे-
मम्मी को पापा को दिल से करू नमस्कार-
सर को मेडम को दिल से करू नमस्कार-
लंबी सड़क चले आना रे, सबको सलाम कर आना रे-
मम्मी को पापा को करू नमस्कार-
सर को मेडम को दिल से करू नमस्कार...

Posted on: Jun 21, 2018. Tags: NIRMALA BALRAMPUR

हमारे गाँव का नाम डुमरकोट कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के दौरान ग्राम-डूमरकोट, पंचायत-भैंसासुर, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से गांव के निवासी प्रेम सिंह मंडावी, दिलीप कुमार बघेल और अनूप मंडावी अंकित पडवार को उनके गांव के नाम के पीछे क्या कहानी है, इसका नाम डूमरकोट कैसे पड़ा, बता रहे हैं उनका कहना है हमारे गांव में कई वर्ष पहले डुमर के बहुत सारे पेड़ थे, डुमर एक फल होता है जो मीठा होता है, उसे खाते है, पेज भी बना कर पीते हैं, ये 12 महीने लगता है, उसी को देखकर पूर्वजो ने गांव का नाम डुमरकोट रखा और आज भी उसी नाम से जाना जाता है| अंकित पडवार@9993697650.

Posted on: Jun 21, 2018. Tags: PREM SINGH MANDAAVI DILIP KUMAR BAGHEL

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