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सकालू मांझी हर बड़खा लकड़ी ला फ़ोरत रहिस...छत्तीसगढ़ी कहानी

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कहानी सुना रहे है : सकालू मांझी हर बड़खा लकड़ी ला फ़ोरत रहिस, ओहर लकड़ी के माझरे-माझर मोट ला मारे लकरी कभूच नई फूटे ओहार टूटकाये-टूटकाये फोरेच भर धरिस तबोच ले नई फुटिस अउ डोकरी दाई हर होहिच करा धान ला बगराये रहिस ओला कुकरी मन खाए बर आये डोकरा दादा हर टगनी का धर के होहिच करा बेठे एहिस अउ सारे कुकरी सा सारे कुकरी सा तीर-तीर ला खा डोकरा दादा भगाए बर लगे है ओ लकरी ला फोरेच है तबो ले नई फूटे फिर डोकरा दादा कहे सा सारे कुकरी सा तीर-तीर ला खा...

Posted on: Sep 19, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले...गीत-

ग्राम-कोटया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक एक गीत सुना रहे हैं :
मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले-
मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले-
सजा के रुख मा बैठे हे खुसरा, हमर पीरत बने रही का करबो दूसरा-
बोहावत के नरवा मा लेहे पड़वा, हय-
तोर दमके जवानी गड़ाले मडवा-
मोला दगा दिये दगा वाली हो तै खाले कमाले...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR

बकरी चराने वाले समारू और मंगलू उरांव की छत्तीसगढ़ी कहानी...

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं: चिर्रू नाम का एक उरांव रहता था, उसके दो बेटे थे जिसका नाम समारू और मंगलू जिसमे सम्हारु बहुत होशियार था, मंगलू होशियार नही था, चिर्रू खतम हो गया और उसके पत्नी वृद्ध हो गई घर के सभी जिम्मेदारी दोनों भाई के ऊपर आ गया| वे दोनों गाँव के बकरी चाराने लगे एक दिन समारू, मगलू से कहा जा रे बकरियों को चारा-चराकर ले आओ, वह थोड़ा चना रखा और चला गया मंझनिया के समय बकरियों को पानी पिला के और महुआ के छाया में सो गया, बकरी बैठ के चारा को पागुर ले रहे थे मंगलू अपने मन में विचार किया, ये बकरी मुझे लड़ने को कह रहे हैं, ये सोचकर जंगली पासा में सभी बकरियों के मार दिया सभी बकरी मर गये, और वे घर वापस अ गया समारू, मंगलू से पूछा बकरियाँ कहाँ हैं, बताया वो मुझे लड़ने के लिए चगली कर रहे थे तो मै उन्हें पासा से मार दिया, फिर मंगलू सोचा कि बकरी हमें नही छोड़ते और वह जाके सभी बकरी को भुदरा में ले जाके छुपा दिया और बकरियों के मालिकों को कह दिया सभी बकरियों को (बिग्वा) चीता खा गया, सभी लोग अपने-अपने बकरियों को खोजने गये, लेकिन एक भी नही पाए सभी मालिक चुपचाप रह गये, अर्थात ये कि व्यक्ति को हमेशा होशियार रहना चाहिए:

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

कोलिहा रैथे खेत खार मा, पानी मा कछुआ रैथे जी...छत्तीसगढ़ी कविता

आश्रित-भरभंवर, पंचायत-सरेखा, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से लक्ष्मण श्रीवास के साथ याशमी और आलिया एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं:
बिलाहा म मुसवा रैथे जी-
कोलिहा रैथे खेत खार मा, पानी मा कछुआ रैथे जी-
चाटी, मेंगरा झिया मा रैथे, मछली तरैया पानी मा-
मेंजका का रैथे दुनो जगा मा, कोठा मा गरुआ रैथे जी-
कुकुर हा रोते खोर गली मा, मिट्ठू रुख-राई मा जी-
केकरा रैथे बिला मा जी...

Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KABHIRDHAM LAXMAN SHRIWAS POEM

नही बांचे नही बांचे नही बांचे ओ, मोर सोन चिरैया...छत्तीसगढ़ी गीत-

परसी, गाम-पचराही, ब्लाक-बोडला, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से बाबूलाल नेटी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
नही बांचे नही बांचे नही बांचे ओ-
नही बांचे ओ मोर सोन चिरैया-
राती मोर आथे गा आँखों मा पानी-
कारी हे चेहरा फुलवासी लागे ओ-
कजरेरी नयना चंदा कस लागे वो-
चंदा कस लागे ओ मोर सोन चिरैया, राति मोर आथे गा आखों माँ पानी...

Posted on: Sep 16, 2018. Tags: BABULAL NETI BODLA CG CHHATTISGARHI KABIRDHAM SONG

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