संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
संकल्पित हो रही जवानी माँ की पीड़ा हरने को-
बिखरी शक्ति संगठित करके-
दुष्ट प्रवित्ति से लड़ने को-
विश्व राष्ट्र व विश्व शांति का-
चिंतन जिसको खलता है... (AR)

Posted on: Sep 27, 2020. Tags: POEM

कैसे गिराये कोई तुम्हे जब बुलंद हो हौसले...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
कैसे गिराये कोई तुम्हे जब हो तुम्हारे बुलंद हौसले-
एक एक कदम आगे बढ़े तो कैसे न मिले मंजिले-
दो हाथ दो पाँव तैयार हो कैसे न मुस्किले टले-
प्यार जो हो हर एक से तो दिल कैसे नफरत पले-
रुकने का तो सवाल ही नहीं जब हम घर से निकल पड़े-
क्या दुश्मन क्या दोस्त हमारे राह में जब चल पड़े-
कैसे गिराये कोई तुम्हे जब बुलंद हो हौसले... (AR)

Posted on: Sep 25, 2020. Tags: POEM

समय की कीमत...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
एक वर्ष की कीमत पूछिये उस विद्यार्थी से-
जिसने वर्ष भर मेहनत की-
किन्तु अंतिम परिक्षा में अमुत्य हो गया-
एक सप्ताह की कीमत पूछिये-
साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक से... (AR)

Posted on: Sep 24, 2020. Tags: POEM

हमसे अच्छे तो पशु पक्षी है, विचरण करते गली गली...कविता-

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
हमसे अच्छे तो पशु पक्षी है विचरण करते गली गली-
यत्र तत्र सर्वत्र हि देखो कोरोना की हवा चली-
जिनके तन पर नहीं है कपड़े-
हाँथ नहीं लगाते हैं-
न साबुन न सेनेटैजर दूरी नहीं बनाते हैं-
मानव का जीना है मुस्किल हालत अपनी है पतली... (AR)

Posted on: Sep 24, 2020. Tags: POEM

वर्तमान युग में बोलना कम बकबक ज्यादा है...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार कविता सुना रहे हैं:
वर्तमान युग में बोलना कम बकबक ज्यादा है-
देखना कम ताकना ज्यादा है-
सुनना कम सुनाना ज्यादा है-
परिश्रम कम थकना ज्यादा है-
शुद्धता कम मिलावट ज्यादा है-
शौन्दर्य का ब्यूटी पार्लर ज्यादा है... (AR)

Posted on: Sep 23, 2020. Tags: POEM

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