जीवन पथ पर चलना शिक्षक हमें बताते हैं...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से शिक्षक के विषय में एक कविता सुना रहें हैं-
जीवन पथ पर चलना शिक्षक हमें बताते हैं-
न्याय और अन्याय का मतलब शिक्षक हमें बताते हैं-
बालक जैसे-गीली मिटटी शिक्षक कुमार बन जाते हैं-
सत्य-न्याय की चाक पर रखकर सुन्दर कलश बनाते हैं-
जग में शिक्षक न होते तो सोचो फिर क्या होता-
पड़ी ही रहती बंजर भूमि, बीज कौन फिर बोता-
डाट-झपक और प्रेम की धमकी देकर हमें पढ़ाते हैं-
पड़े जो हम मजधार में मौका बनकर आते हैं-
यही है वृक्ष यही है विष्णु इन्हें झुकाओ नितदिन शीश-
कर्तव्य मार्ग पर लाकर तूमको ये ज़िन्दगी ये अपना आशीष देते हैं-
जीवन पथ पर चलना हमको शिक्षक हमे बताने हैं-
न्याय और अन्याय मतलब शिक्षक ही समझाते हैं...

Posted on: Oct 20, 2020. Tags: POEM

प्रेरणादायक विचार-"ओस की बूँद-सी होती है बेटियां "

सुरेश कुमार बड़वानी, मध्यप्रदेश से बेटियों के लिए कुछ लाइने सुना रहे हैं -”ओस की बूँद सी होती है बेटियां, फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां, रोशन करेगा बेटा तो बस एक ही कुल को दो-दो कुलों की लाज को ढोती है बेटियां, हीरा है अगर बेटा तो मोती है बेटियां औरों के लिए फूल ही बोती है बेटियां, मिट्टी में मर-नीर सी होती है बेटियां, घर की शान होती है बेटियां, माँ-बहन, पत्नी का फ़र्ज निभाती है बेटियां, इस कुल को आगे बढाती है बेटियां, सोना है अगर बेटा तो चांदी है बेटियां,बेटे को अच्छा खाना खिलाते हैं तो बेटियों को जूठन, बेटियां हो तो गृहस्थी को सजाती है, बेटियां हो तो दूसरों के आँगन की लाज बन जाती है, ओस की बूँद सी होती है बेटियां, इस फर्श खुरदुरा हो तो रोती है बेटियां”|

Posted on: Oct 19, 2020. Tags: POEM

जाग नवजवान जाग संस्कृति पुकारती...

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं| यदि आप ऐसे संदेश रिकॉर्ड करना चाहते हैं तो 08050068000 पर मिस्ड कॉल कर सकते हैं|
जाग नवजवान जाग संस्कृति पुकारती...(AR)

Posted on: Oct 18, 2020. Tags: POEM

छड़ी दृष्टिबाधितों की दृष्टि है...कविता-

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व छड़ी दिवस पर एक गीत सुना रहे हैं:
छड़ी दृष्टिबाधितों की दृष्टि है-
कैसी अद्भुत श्रृष्टि है-
एक छड़ी एसी है ओल्ड-
जो हो जाती है फोल्ड-
आ जाती है जेब में... (AR)

Posted on: Oct 15, 2020. Tags: POEM

जंगल में रहता है एक चिड़िया एक चिड़िया भई एक चिड़िया...कविता-

परियोजना दरभा जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी बाई कश्यप यह एक कविता सुना रही है-
जंगल में रहता है एक चिड़िया एक चिड़िया भई एक चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है,दो चिड़िया दो चिड़िया भई दो चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है,तीन चिड़िया तीन चिड़िया भई तीन चिड़िया
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
जंगल में रहता है चार चिड़िया चार चिड़िया भई चार चिड़िया-
एक खाया फुर से पता नही किधर से-
अब पुरे पांच चिड़िया बच गये भई पांच चिड़िया बाख गये...RK

Posted on: Oct 15, 2020. Tags: POEM

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