चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे...फागुन गीत

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक फागुन गीत सुना रहे है:
चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे-
रानकर ला हरा यहाँ उड़कर फहरा यहाँ सैया हमर घर आवे-
गंगा के लहर-लहर दूर के फहर-फहर अब लहर दा रे-
चुमू कहर चुमुक-चुमुक बाजे रे सैया हमर घर आवे...

Posted on: Feb 22, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

लाख-लाख गाँव वाला है, हिन्दुस्तान किसान का...किसान कविता

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया खेती-किसानी और भारतीय किसान पर एक कविता सुना रहे है:
लाख-लाख गाँव वाला है, हिन्दुस्तान किसान का-
करने को निर्माण चला है यथा वीर जवान का-
सींच पसीने की बूंदों से धरती हरी बनायेंगे-
ऊपर बंजर धरती में भी फसल नया उगायेंगे-
भाग्य सजाने चले आज हम खेती व खलियानों का...

Posted on: Feb 20, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

काले मुहं का बंदर है, पेड़ खूब हिलाता है...बंदर और चिड़िया की कविता

ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया बन्दर और चिड़िया पर आधारित एक कविता सुना रहे है:
काले मुहं का बंदर है, पेड़ खूब हिलाता है-
कच्चा हो या पक्का फल पूरा ही खा जाता है-
चिड़िया प्यारी-प्यारी है धीरे से आ जाती है-
मम्मी जो भी खेला लाती चुपके से खा जाती है...

Posted on: Feb 18, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

चार पैर वाली कहलाती लेकिन कभी न चल पाऊँ...कविता

कैलाश सिंह पोया ग्राम देवरी जिला सूरजपुर छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे है :
चार पैर वाली कहलाती लेकिन कभी नही चल पाऊँ-
सबको अच्छी नींद सुलाती बताओं मै क्या कहलाऊँ-
बच्चे तुझे चित्र बनाते मैं लिखते-लिखते घिस जाऊं-
मेरा लिखा रबर से मिटाता, बताओं मै क्या कहलाऊँ...

Posted on: Feb 16, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

"आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए उनके धर्म और संस्कृति को आगे बढ़ाना भी बहुत जरूरी है"...

कैलाश सिंह पोया ग्राम-देवरी जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से हैं और उनके साथ आज गोंडी धर्माचार्य छोटेलाल सिंह परस्ते हैं जो गाँव कैसौरी जिला-शहडोल मध्यप्रदेश से हैं इन दोनों की मुलाकात सीजीनेट स्वर कार्यशाला ग्राम-जमुड़ी जिला- अनूपपुर मध्यप्रदेश में हुई हैं कैलाश बता रहे हैं कि सूरजपुर छत्तीसगढ़ में गोंडवाना के वास्ते गोंडवाना स्कूल चल रहा है छोटेलाल जी का कहना हैं जिसप्रकार से आप लोग लगे हैं हम भी यही चाहते हैं कि हमारे जिलों में भी ऐसे स्कूल संचालित हो और हमारी भावी पीढी हमारे धर्म और संस्कृति के बारे में जाने और उसे बनाये रखने के लिए कार्य करे. धर्म और संस्कृति को बचाना और उसे आगे बढ़ाना मानव सभ्यता के लिए बहुत आवश्यक है.कैलाश सिंह पोया@9479003196

Posted on: Feb 16, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA

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