पर्यटक स्थल विडकोंडा पर चर्चा...(गोंडी में)

तालुका-भामरागड़, जिला-गढ़चिरोली से नीलकंठ राव कोडापे बता रहे हैं, कि वहां पर नदी है, पहाड है, एक जगह है विनाकोंडा जहाँ पर ऊपर से पानी गिरता है, विनाकोंडा एक झरना है जहाँ पर इन्द्रधनुष जैसा दिखाई देता है, यहाँ पर शहरों के लोग इस सुन्दर दृश्य को देखने आते हैं, वहा पर शेर का गुफा है, गुपा में हमेसा 12 माह शेर रहता है, मोर, हिरण, बन्दर, चीता आदि देखने को मिलते हैं, पहले वहां जाने के लिये अच्छी सड़क नहीं थी लेकिन पहले से अच्छी सड़क बन चुकी है, लोग वहां जाते हैं |

Posted on: May 19, 2020. Tags: BHAMRAGADH GADHCHIROLI MH GONDI STORY NEELKANTH KODAPE

हम लोगों का रोजी रोटी साधन तेंदूपत्ता है, लेकिन इस वर्ष तेंदूपत्ता तोड़ाई करने वाले नहीं आ रहे है...

नगर पंचायत-भामरागड, जिला-गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) से रामदास अंकालू मडावी बता रहे है कि गर्मी के सीजन में उनकी रोजी रोटी का साधन तेंदूपत्ता है लेकिन इस वर्ष तेंदूपत्ता तोड़ाई करने वाले लोग नहीं आ रहे है | जो रेट में तेंदूपत्ता हम लोग उनको देते थे उस रेट से इस वर्ष बहुत कम है | अभी तक तेंदूपत्ता तोड़ाई करवाने वाले नहीं आ रहे है | इसलिए इस वर्ष हम लोगो को रोजी रोटी की दिक्कत होने वाली है ऐसा बता रहे है |

Posted on: May 19, 2020. Tags: BHAMRAGADH GADHCHIROLI MH GONDI STORY RAMDAS ANKALOO MADAVI

ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)

ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG DURGKONDAL DURGURAM KAVACHI GONDI KANKER STORY

एक लड़का (झेलकार) और एक लड़की (मंझारो) की कहानी... (गोंडी भाषा में)

ग्राम-मरकाबेडा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से रानो वड्डे गोंडी भाषा में एक कहानी सुना रही है: एक लड़का रहता है उसका नाम रहता है झेलकार, एक लड़की रहती है उसका नाम रहता है मंझारो : लड़की बोलती है लड़के से झेलकार चलो जामुन खाने को तो लड़का बोलता है कि मैं जामुन खाके आया हूँ| तो लड़की बोलती है चलो जो खाके आये हो वो दिखाना तो लड़का बोलता है वो मिटटी हो गया तो फिर चल मिटटी को दिखाना बोलती है| तो उसका हंडी बनाये है तो हंडी को दिखाना तो बैल फोड़ दिया तो फिर क्यों बैल फोड़ दिया तो बोल रहे है कि बच्चे को दूध नहीं दिया इसलिए फोड़ दिया तो क्यों बच्चे को दूध नहीं दिया घास नहीं उगा इसलिए तो क्यों घास नहीं उगा तो पानी नहीं गिरा तो क्यों नहीं गिरा तो मेंढक क्यों नहीं चिल्ला रहे है तो लड़के लोग मार रहे है इसलिए तो लड़के लोग क्यों मार रहे है तो एक बुढा व्यक्ति रहता है वो हर दिन लडको को दारु लाकर देते है इसलिए मारते है|

Posted on: Jul 18, 2018. Tags: GONDI STORY RANO WADDE

स्कूल पढने वाली एक लड़की की कहानी (गोंडी भाषा में)

ग्राम-गुंदुल, तहसील-पखांजूर, विकासखंड -कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रमा कडियम एक गोंडी कहानी बता रही है : स्कूल में एक नई लड़की ने प्रवेश लिया, सर ने क्लास में रूपा को परिचय कराया, इस क्लास में रूपा पढेगी फिर वे रूपा से बोली ,रूपा ! तुम्हारी सहपाठिने तम्हें बता देंगी कि वे कौन-कौन से पाठ पढ़ चुकी है कोई कठिनाई होने पर वे तुम्हारी सहायता करेगी | रूपा कम पढ़ती है ,रूपा कम बोलती थी ,वह चुप ही रहती थी उसकी सहपाठिन उससे बात करना चाहती थी ,लड़कियों ने भी दो -तीन दिन तो उससे बात करने की कोशिश की ,फिर वे अपनी-अपनी सहेलियों में मस्त हो गई, उन्हें लगा रूपा किसी से बात करना पसंद नहीं करती. एक दिन स्कूल से बच्चे पिकनिक सर मेडम लोग के साथ मनाने गये ,सबने सोचा ,रूपा नहीं जाएगी परन्तु पिकनिक के दिन रूपा ही पहले विद्यालय के फाटक पर खड़ी थी ,पिकनिक का स्थान छोटी झील का किनारा था ,ऊँचे-ऊँचे वृक्षों से घिरा यह स्थान पिकनिक के लिए बहुत उपयुक्त था. पहाड़ी स्थल होने के कारण ऊँची-नीची भूमि पर खिले रंग -बिरंगे फूल और लतायें झील की शोभा और भी बढ़ा रही थी लड़कियां वहां जाकर हंसी. लडकियों के ठहाको से वातावरण गूंजने लगा. सभी इधर-उधर भाग कर अपने लिए अच्छे-अच्छे स्थान खोजने लगी. मेडम ने एक सुंदर जगह देखकर दरिया बिछवा दी और बोला पहाड़ के ऊपर इधर-उधर घूमने जाना नहीं चाहिये .पहाड़ में जंगल बहुत है | सभी एक साथ रहेंगे किसी को झगड़ा नही करना चाहिए | बच्चो को अच्छे खाना बनाकर खिलाएंगे बच्चे बहुत खुश हुये. मेडम और सर भी बच्चो के साथ बहुत खुश थे |

Posted on: Jul 11, 2018. Tags: GONDI STORY RAMA KADIYAM

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