गाँव के जंगल से गिद्ध विलुप्त होने की कहानी...

ग्राम-मोदे, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-उतर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार पटेल बता रहे हैं कि उनके गाँव में पहले बहुत गिद्ध हुआ करते थे, अब गाँव में गिद्ध नहीं दिखते| पहले गाँव में यदि कोई जानवर मर जाए तो गिद्ध दिख जाया करते थे, उन्हें देख बच्चे भी बहुत आनंद लिया करते थे| अब गिद्ध विलुप्त हो गये हैं, कीटनाशकों के ज्यादा उपयोग से वे विलुप्त हो गये साथ-साथ कई जानवर भी विलुप्त हो गये| अब जंगलों में केवल भालू और बंदर ही दीखते हैं| हो सकता है शिकारियों के कारण जानवर जंगलों से विलुप्त हो रहे हैं| अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क @9479070321, 6268684544.(185653) GT

Posted on: Feb 28, 2021. Tags: CG CULTRAL STORY KANKER MANOJ KUMAR PATEL

आमाझरन झरना की कहानी...

ग्राम-मुदे, थाना-कोरर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से प्रेमलाल करतबिया अपने गांव कि पहाड़ी के बारे में बता रहे हैं, आमाझरन एक जगह है, यहां प्रकृतिक रूप से पानी बहता है और बड़े-बड़े आम फलते हैं| यहाँ बारह महीना पानी बहता रहता है| पहाड़ के निचे छुही का खदान है, जिससे घरों में पुताई होती है| इस मिट्टी को लेने दूर-दूर से लोग आतें हैं| पीले रंग की मिट्टी निकलती है| पहाड़ के ऊपर एक बहुत बड़ा मैदान है, गांव भी छोटा पड़ेगा इतना बड़ा मैदान है| इस मैदान में मनिहारी का पेड़ है जिससे फल और शुद्ध हवा मिलती है| आने जाने का रास्ता भी नहीं है, बहुत दिक्कत होती है| हरियाली और पोला के त्यौहार में गाँव के लोग वहाँ घुमने जाते हैं| सम्पर्क:- 6264476828(RM)

Posted on: Feb 28, 2021. Tags: CULTURAL STORY KANKER CG PREMLAL KRATBIYA

खरगोश और लोमड़ी की...कहानी

ग्राम मसूरी, जिला-चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) से गुरु प्रसाद एक कहानी सुना रहे हैं:
एक लोमड़ी थी उसे बहुत भूख लगी थी| लोमड़ी ने अंगूर देखा और उसे खाकर अपना भूख मिटाऊँ| यह सोचकर लोमड़ी बाग में गई और जोर से छलांग लगई ताकि अंगूरों तक पहुच सके, वह धड़ाम से निचे जा गीरी| लोमड़ी को बहुत शर्म आई फिर लोमड़ी चुप-चाप वहां से चली गयी| एक खरगोश सब कुछ देख रहा था| खरगोश ने लोमड़ी को बोला क्यू अंगूर नही खाओगी लोमड़ी ने बोली| मैंने सुना है की अंगूर बहुत खट्टे होते हैं|

Posted on: Feb 28, 2021. Tags: CHITRAKOOT GURUPAPRSAD STORY UP

लोहातर सोनादाई कंडरा राजा की कहानी...

ग्राम-बांगाचार, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वेदबती छुरपाल अपने गाँव कि लोहातर सोनादाई के बारे में बता रही है, उनके गाँव में पूर्वजों के समय एक राजा कंडरा रहता था, राजा के पास घुडसवार, गाय, बकरी चराने वाले सैनिक रहते थे| बकरी चराने वाला रोज बकरी चराकर लाता था, एक दिन बकरी चराने वाला जंगल गया| बकरी चराते-चराते थक गया और एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया| जिस पेड़ के नीचे वह बैठा था, वह सोने का पेड़ था| उसे पेड़ के पत्ते अच्छे लगे उसने सभी बकरियों के कान में पत्ते पहना दिए और शाम हो गयी, वो सभी बकरियों को राजा के पास ले गया और अपने घर चला गया| राजा ने देखा बकरियों के कान में पत्ते चमक रहे थे, राजा ने तुरंत बकरी चराने वाले को बुलावा भेजा| बकरी चराने वाला डरते हुए, राजा के पास आया| राजा ने पूछा कि आपने ये पत्ते बकरी के कान में क्यों पहनाये हैं| बकरी चराने वाला बोला राजा जी ये पत्ते मुझे अच्छे लगे तो मैंने पहना दिए, दुसरे दिन सुबह-सुबह घुडसवार तैयार किये और उस सोने के पेड़ की खोज में निकल गए| उस पेड़ तक पहुँचते पहुँचते शाम हो गयी और पेड़ जमीन के अंदर धसते गया, तो राजा ने उस पहाड़ को खोदने के बारे में सोचा और श्रमिक बुलाये पहाड़ को खोदना शुरू कर दिए| पहाड़ को खोदने पर पानी निकला, इताना पानी निकला की उस पहाड़ को जितने श्रमिक खोद रहे थे, सभी पानी में बह गए और साथ में राजा भी बह गया| बाहर रानी थी, वह भी बह गयी, सोने का पेड़ था| वो पेड़ अभी भी जीवित है, उस झरने में जब मछली या जीव जन्तु उस सोने से टकराते हैं तो सोना बहार आ जाता है और सोनझरिया लोग इसी सोना को खोजते हैं और बेचते हैं और अपना जीवन यापन करते हैं|(RM)

Posted on: Feb 28, 2021. Tags: CG CULTRAL STORY KANKER VEDBATI CHURPAL

भानुप्रतापपुर का यह नाम कैसे पड़ा-कहानी...

ग्राम-खराटी, ब्लॉक-भानुप्रतापपुर, जिला-उतर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से वीरसिंह पद्दा अपने गांव कहानी बता रहे हैं कि उनके ब्लॉक का नाम भानुप्रतापपुर कैसे पड़ा| यहाँ गढ़वासला में दंतेश्वरी माता का मंदिर है, यहां राजा कंडरा का राज था| यहीं से माँ दन्तेश्वरी की स्थापना हुई, यहां एक भानुप्रताप देव नामक राजा थे इसी के नाम से अभी भी भानुप्रतापपुर नाम से जानते हैं| आसपास 210 से 211 गांव आते हैं, सभी गांव के लोग यहां पूजा अर्चना करने आते हैं| जैसे कि दशहरा, बाल पर्व, नवरात्रि आदि पर्व मानते है| इस पहाड़ी के अंदर गुफा भी है, गुफा के अंदर मैदान भी है और यहां सभी लोग नहीं जा सकते| मांझी, गायता और समाज के लोग पूजा अर्चना करते हैं| वहाँ बाहर के लोगों का जाना मना है| सम्पर्क:- 9406477564(RM)

Posted on: Feb 28, 2021. Tags: STORY

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