तेरी पनाह में हमें रखना सीखें हम नेक राह पर चलना...गीत-

जिला-बालोद (छत्तीसगढ़) से तामेश्वरी और संगीता एक गीत सुना रहे हैं :
तेरी पनाह में हमें रखना सीखें हम नेक राह पर चलना-
कपट करम चोरी बेईमानी और हिंसा से हमको बचाना-
निर्मल गंगाजल ही बनाना अपनी निगाह में हमें रखना-
क्षमावान कोई तुझसा नहीं और मुझसा नहीं कोई अपराधी-
पुण्य की नगरी में भी मैने पापों की गठरी ही बांधी हो हो-
करुणा की छाँव में हमें रखना...

Posted on: Apr 11, 2019. Tags: BALOD CG RADHA KACHLAM SONG

नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ...गीत-

ग्राम-कुम्हारी, पंचायत-भैसागाँव, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से प्रेरणा, विनय, मयंक और मोनिका एक गीत सुना रहे हैं :
नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ-
बोलो मेरे संग, जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद-
रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के-
चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के-
मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम-
आगे ही आगे बढ़ाउंगा कदम-
दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम...

Posted on: Apr 11, 2019. Tags: CG KANKER RADHA KACHLAM SONG

होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन...देश भक्ति गीत-

ग्राम-कुम्हारी, पंचायत-भैसागांव, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से नीलिमा हुसेंडी, यमुना वैस, विद्या और दिव्या एक कविता सुना रहे हैं :
होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन-
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास-
हम होंगे कामयाब एक दिन-
हम चलेंगे साथ-साथ, डाल हाथों में हाथ-
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन-
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास...

Posted on: Apr 07, 2019. Tags: ANTAGARH CG KANKER RADHA KACHLAM SONG

हाथी भालू दोनों में था, सच्चा-सच्चा मेल...कविता-

ग्राम-कुम्हारी, पंचायत-भैसागांव, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से नीलिमा हुसेंडी और यमुना वैस एक कविता सुना रहे हैं :
हाथी भालू दोनों में था, सच्चा-सच्चा मेल-
दोनों मिलकर खेल रहे थे, लुका छिपी का खेल-
हाथी बोला सुन भैया भालू मै अब छुपने जाता हूं-
पानी वाली जगह मिलूंगा पक्की बात बताऊंगा...

Posted on: Apr 07, 2019. Tags: ANTAGARH CG KANKER POEM RADHA KACHLAM

दीदी का जब व्याह रचाया मेरे माता और पिता ने...कविता-

ग्राम-कुम्हारी, पंचायत-भैसागाँव, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से नीलिमा हुसेंडी, जमुना और सुनीता एक कविता सुना रहे हैं :
दीदी का जब व्याह रचाया मेरे माता और पिता ने-
मेहमानों को तब बुलाया मेरे माता और पिता ने-
दिल्ली से फिर दादा-दादी, नाना-नानी आये-
साथ में बिंदिया, चूड़ी कंगन कई भेटिया लाये-
मामा-मामी, काका-काकी, मौसा-मौसी आये-
धूम धाम से हुई सगाई दीदी की थी शादी...

Posted on: Apr 06, 2019. Tags: CG KANKER POEM RADHA KACHLAM

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