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सडकाहारी खेते बीड़ा रोपे गयले रे पानी बिसायते भीता...हल्बी किसान कर्मा गीत-

आश्रित ग्राम-तोड़हुर, पंचायत-हलमानपुर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से दसराम एक्का, गुलाब तिर्की, जहरसाय बेग हल्बी भाषा में एक कर्मा गीत सुना रहे है, जिसमे खेती में रोपा लगाते समय पानी के अंदर बिच्छू काट देने की बात को बता रहे हैं :
सडकाहारी खेते बीड़ा रोपे गयले रे पानी बिसायते भीता-
आ गए रे बली बिचारेते फींदा देगें-
हे दगी भगा दें तडकारी के ते बीरा रोप दे दें रे-
पानी भीता रे ते सींदा गए रे पानी भिंदा-
चली दादा रे या मन को पुकाना को कयो रे...

Posted on: Sep 22, 2018. Tags: CG HALBI KANKER KARMA KOELIBEDA MOHAN YADAV SONG

हमारे गाँव में आंगनवाड़ी नहीं, छोटे बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, वे असुरक्षित सिर्फ खेलते रहते हैं -

ग्राम-हनफरसी, पंचायत-धोरकट्टा, तहसील-पखांजूर, ब्लॉक-कोयलीबेडा,
जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से संगीता हीरा, मंजू मंडल और मोनीता वती कोरी बता रहे हैं, उनके गाँव में आंगनवाडी नही है, इसके लिए वे कई साल से आवेदन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उस पर कोई सुनवाई नही हो रही है, अधिकारी बनेगा कहकर गुमराह कर रहे हैं, आंगनवाड़ी नही होने से बच्चे खेलते रहते है, उनकी चिंता रहती है, आंगनबाड़ी होने से बच्चे ब्यस्त रहते हैं, और सुरक्षा में है, और पढ़ लिख कर आगे बढ़ सकते है, इसलिए सीजीनेट के सांथियो से अपील कर रहे हैं कि दिए गए नंबरो पर अधिकारियों से बात कर समस्या को हल कराने में मदद करें :
SDO@8878067456, कलेक्टर@9425584388. संपर्क नम्बर@9754684672.

Posted on: Sep 22, 2018. Tags: AMAR MARAVI ANGANWADI CG KANKER KOELIBEDA PROBLEM

हमे भाषा सीखने के लिए कोई स्कूल की जरुरत नहीं होती, आपस में मित्रता बनाकर सीख सकते हैं...

ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उतर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव के साथ गाँव के साथी प्रभु पद्दा जुड़े है, वे भाषाओ पर आपस में चर्चा कर रहे हैं प्रभु पद्दा गोंडी में बता रहे हैं कि चार भाषा जानते हैं प्रभु पद्दा किसी बंगला स्कूल में नहीं पढ़े हैं, गोरमेन्ट स्कूल में बंगाली के बच्चे आते थे|उन लोगों के साथ मित्रता बनाकर बंगाली भाषा सीखा हैं,और प्रभु पद्दा एक ही व्यक्ति था माडिया जाति से बाकि पूरे गोरमेन्ट स्कूल में बंगाली और छत्तीसगढ़िया लोग पढ़ते थे |प्रभु पद्दा ने वहीँ से बंगाली भाषा, छत्तीसगढ़िया भाषा, हिंदी भाषा सीखा हैं | तब से वे चार भाषा जानते हैं,इस प्रकार हमे भाषा सीखने के लिए किसी स्कूल की जरुरत नहीं होती है, आपस में मित्रता बनाने से भी सीख सकते है|

Posted on: Sep 19, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA MOHAN YADAV

आना मेरे गाँव तुम्हे मै दूंगी फूल कन्हेर के...कविता

ग्राम-फुरफुन्दी, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रेखा ताम्रकार, अनीता साहू, चांदनी साहू और तमन्ना साहू एक कविता सुना रहे हैं :
आना मेरे गाँव तुम्हे मै दूंगी फूल कन्हेर के-
कुछ कच्चे, कुछ पक्के घर हैं, एक पुराना तार है-
सड़क बनेगी सुनती हूँ, इसका नंबर इस साल है-
चढ़ते आना टीले ऊपर, कई पेड़ हैं बेर के-
बाबा ने था पेड़ लगाया, बापू ने फल खाए हैं...

Posted on: Sep 19, 2018. Tags: CG KANKER KOELIBEDA POEM SAPNA WATTI

किसान स्वर : हम लोग अब गाय बैल घर में नहीं रखते तो खेती के लिए गोबर खाद भी नहीं मिलता...

ग्राम पंचायत-हान्केर, तहसील-पखांजुर, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर, (छत्तीसगढ़) से सुरेश बता रहे हैं कि उनके गाँव क्षेत्र में अधिकतर धान और मक्का का खेती किया जाता है, उसकी तैयारी वे जमीन की अच्छी तरह से जुताई करने के बाद, बीज की बोवाई करते हैं जिसमे वे मुख्य रूप से रासायनिक खाद का उपयोग करते हैं, पहले लोग गाय, बैल घर में रखा करते थे जिससे उन्हें गोबर (खाद) मिल जाता था, लेकिन अभी वर्तमान में गाय को घर में ज्यादातर नही रखा जा रहा है इसलिए वे रासायनिक खादों का उपयोग करते हैं, जिससे जमीन की उर्वरक शक्ति कम होती जा रही है, पहले लोग गोबर खाद का उपयोग करते थे उसमे तीन साल तक कोई खाद डालने की जरुरत नही होती थी, इसलिए अधिक मात्रा में गोबर खाद का उपयोग करना चाहिए जिससे फसल में अधिक उत्पादन के साथ-साथ जमीन की उर्वरक शक्ति भी नष्ट न हो...

Posted on: Sep 18, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG KANKER KISAN KOELIBEDA SWARA

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