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हमारे यहाँ गोंडी बोलने वाले शिक्षक आ जाये तो शिक्षा का स्तर सुधर सकता है, अभी बच्चे नहीं समझते...

ग्राम पंचायत-हान्केर, तहसील-पखांजुर, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बलराम कुलदीप, लवकुमार और सुरेश आचला सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा के अमर मरावी को बता रहे हैं कि उनके गाँव क्षेत्र में अधिकतर लोग, बच्चे से बूढ़े सभी गोंडी अधिक बोलने वाले हैं, इनके गाँव के स्कूल प्राथमिक या माध्यमिक में ज्यादातर शिक्षक हिंदी, छत्तीसगढ़ी बोलने वाले हैं, वहां के स्कूल में गोंडी बोलने वाले शिक्षक नही है जिससे बच्चों के साथ बातचीत का आदान-प्रदान पूर्ण रूप से नही हो पाता है, इससे पढाई में भी परेशानियां होती है अगर कोई गोंडी बोलने वाले शिक्षक आ जाए तो प्राथमिक विद्यालय में अध्धयन के स्तर में काफी मात्रा में सुधर हो सकता है |

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG EDUCATION GONDI KANKER KOELIBEDA

विरल-विरल तुरी उमर चितोरी...गोंडी बाल गीत

ग्राम-पंचायत-बड़ेबेटिया, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से स्कूल की कक्षा 3 की छात्रा कुमारी लिलिमा उसेंडी एक गोंडी गीत सुना रही हैं:
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
तनी उम्र मार-मार चल चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
ओ बेंड बाजा-
विरल-विरल तुरी उमर चितोरी-
बेंड बाजा मोके पडला मू-
तनी उम्र मार -मार चल चितोरी...

Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHILDREN GANESH AYAM GONDI KANKER KOELIBEDA SONG

मुझे गोंडी के अलावा कोई दूसरी भाषा नहीं आती है, मेरे जैसी यहां ऐसी बहुत सारी लड़किया हैं...

ग्राम-पड़ेंगा, ब्लॉक-कोयलीबेड़ा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के मोहन यादव के साथ मानको आचला गोंडी में बता रही है कि वे पढ़ी लिखी नहीं है घर में काम करने के कारण पढाई नहीं की| उनके दो भाई और दो बहन है | उसको गोंडी भाषा के अलावा कोई दूसरी भाषा नहीं आती है | गाँव से बाहर नहीं गई इसलिए सीख नहीं पायी| ऐसी बहुत सी युवतियां है | जिनको गोंडी के अलावा दूसरी भाषा नहीं आती है|

Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG GONDI KANKER KOELIBEDA MOHAN YADAV

हम गांव के लोग नया फसल आने पर देवी देवताओं की पूजा और नाच गाकर नवा त्यौहार मानते हैं...

ग्राम-जामकुटनी, पंचायत-बेलगाल, तहसील-पखांजूर, थाना-चौबेटिया, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मानसिंह दुग्गा बता रहे हैं, उनके गांव में आदिवासियो का एक मुख्य त्योहार मनाया जाता है, जिसे नवा त्योहार कहते हैं, उस त्योहार में लोग गीत गाते हैं, नाचते हैं, देवी देवताओं की पूजा करते हैं, साथ ही जो फसल होती है उसको सबसे पहले अपने देवी देवताओं पर चढाते है, उसके बाद ही उपयोग करते हैं, यह त्यौहार में मुख्य रूप से नया खाने अर्थात जो नया फसल होता उसका पहला भोग अपने देवी देवताओं को देकर खाना है, यह त्यौहार वे अपने पूर्वजो के ज़माने से मनाते आ रहे है, इसमें वे प्रकृति के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हैं...

Posted on: Sep 13, 2018. Tags: AMAR MARAVI CG CULTURE KANKER KOELIBEDA

पहले शौचालय की सुविधा नही थी, अब सरकार सुविधा दे रही है तो उपयोग करते हैं, कुछ नहीं करते...

ग्राम-कन्हारगाँव, पंचायत-विकासपल्ली, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव गाँव के सरपंच दारसू गावड़े और ग्राम निवासी 70 वर्षीय लिंगो दादा से गोंडी में चर्चा कर रहे हैं. गाँव के सरपंच बता रहे हैं कि हमने पंचायत द्वारा स्वीकृत 52 शौचालय का निर्माण पंचायत स्तर पर करा दिया है, लेकिन कुछ लोग उपयोग करते हैं और कुछ नही करते, जिसका जवाब हितग्राही ही दे सकते हैं, वहीँ लिंगो दादा जो 2वर्ष से शौचालय का उपयोग कर रहे हैं, उनका कहना है, कि हम आदिवासी समाज से हैं, पहले शौच की सुविधा नही थी, तो जंगल जाते थे, लेकिन सरकार अब सुविधा दे रही है तो उपयोग करते हैं, इस तरह वे दूसरो को भी प्रेरित करते हैं |

Posted on: Sep 12, 2018. Tags: CG KANKER KOELIBEDA MOHAN YADAV STORY TOILET

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