"नवा खाई" बस्तर की आदिवासी अनूठी लोक संस्कृति परम्परा, मगर ख़ास...

ग्राम-मरकाबेहड़ा, पंचायत-तालामीमुंजमेठा, ब्लॉक-नारायणपुर, जिला-नारायणपुर
(छत्तीसगढ़) से मोहन जो कि सामाजिक कार्यकर्ता लखन मंडावी से बस्तर के आदिवासी लोक संस्कृति में से एक नवा खाई अनूठी संस्कृति जो परम्परा सदियों से चली आ रही है इसमें खास बात यह है कि, नवा धान चावल की प्रसादी बनाई जाती है, गाँव में पहले पूजा की जाती है, उसके बाद घर के अंदर ही प्रसादी ग्रहण की जाती है, यह प्रसादी केवल परिवार के सदस्यों के लिए होती है, किसी अन्य को नहीं दी जाती|इस दिन घर के छोटे, बड़े बुजर्गो से विशेष आशीर्वाद लेते है. यह संस्कृति आज भी देश के आदिवासी क्षेत्रो में है, ख़ासकर बस्तर के आदिवासी क्षेत्र में नवा खाई के पहले नव धान का प्रयोग नहीं होता है...

Posted on: Nov 17, 2019. Tags: MOHAN YADAV NARAYANPUR CG

राशन दुकान का सराहनीय कार्य, वितरण प्रणाली न्याय संगत...

ग्राम-बोरंड, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से हेमंत कुमार यादव जो कि बता रहे है| कि गाँव की राशन दूकान पर अनाज मिलता है. दुकान संचालक हेमंत कुमार यादव, बता रहे है. गाँव में 336 परिवार ग़रीबी रेखा से निचे जीवन यापन करने वाले है| अभी जो राशनकार्ड है, उनको लाभ दिया जाता है| बाकि लोंगों को राशन प्रणाली के हिसाब से दिया जायेगा. अभी पंचायत से बहार से आये लोंगों को राशन का लाभ दिया जाता है, जो कि गाँव से 25 किलोमीटर से ज्यादा है, यह कार्य बहुत ही सराहनीय है. जो हर राशन दुकान पर इस प्रकार का कार्य होना चाहिए. आभार के साथ धन्यवाद...

Posted on: Nov 14, 2019. Tags: MOHAN YADAV NARAYANPUR CG

पहले यहाँ शेर बहुत हुआ करते थे, जिसके चलते गाँव का नाम "बाघडोंगरी" हो गया...

ग्राम-बाघडोंगरी, जिला-नारायपुर (छत्तीसगढ़) से मंगलराम पोटाई जो कि बाघडोंगरी पंचायत के सरपंच है, साथ है चैनसिंह पोटाई जो कि गाँव के बारे में जानकारी दे रहे है. बता रहे है कि गाँव नाम बाघडोंगरी कैसे पड़ा, पहले यहाँ पहाड़ जंगल बहुत हुआ करता था, तो यहाँ शेर भी बहुत रहते थे, जिसको की बाघ भी कहते है. डोंगर मतलब पहाड़ जंगल हो गया जिसके चलते गाँव का नाम बाघडोंगरी पड़ गया, पहाड़ के उस पार दूसरा गाँव है, फूलकोडो है. गोंडी ‘फूलकोडो’ अर्थ फूलोँ का बगीचा होता है. बाघडोंगरी को दोनों नाम से जाना जाता है. गोंडी में फूलकोडो के नाम से भी जाना जाता है. प्रकृति से जुड़े रहने के कारण पहले रहने वाले लोगों के द्वारा ज्यादातर गाँवो के नाम ऐसे ही पड़ते थे.

Posted on: Nov 14, 2019. Tags: MOHAN YADAV NARAYANPUR CG

छोटे-छोटे कदम हमारे, आगे बढ़ते जायेंगे...कविता-

ग्राम-चिनारी, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव गाँव की प्राथमिक शाला के बालक-बालिकाओं, सेवंती, समोती, मनीष व अन्य साथियों से कविता सुन रहे है:-
छोटे-छोटे कदम हमारे, आगे बढ़ते जायेंगे-
पढ़ना कभी न छोड़ेंगे, हर दम पढ़ने जायेंगे-
छोटे-छोटे हांथ हमारे, गड्ढ़े खूब बनायेंगे-
इस गड्ढ़े में अच्छे सुन्दर, पौधे खूब लगायेंगे-
घर आंगन को साफ़ रखेंगे, गलिया साफ बनायेंगे-
कैसे जीना हमे चाहिए, जी कर हम दिखलायेंगे...

Posted on: Nov 13, 2019. Tags: MOHAN YADAV NARAYANPUR CG SONG

गौवंश को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के लिए, गौठान सबसे बेहतर उपाय...

ग्राम-केकराखोली, ब्लॉक-मगरलोड, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़) से सुबेलाल व अन्य ग्रामीण गौठान के बारे में जानकारी दे रहे है| एक तरफ़ जहा देश में गोवंश पर मौत का खतरा बना रहता है, वहीं दूसरी तरफ़ ग्रामीण भारत के अधिकतर गाँवों में गौ-ठान की व्यवस्था कई वर्षो से यह परम्परा चली आ रही है. ऐसे ही देश के छत्तीसगढ़ राज्य के छोटे से गाँव केकराखोली में है जो कि गाँव की सार्वजनिक भूमि पर करिबन 3 एकड़ का गौठान है, जहाँ पर पिने के पानी की व्यवस्था भी पंचायत द्वारा की गई है गाँव के सभी लोंगो की मवेशिया रहती है, सुबह 6-7 बजे से दिन के 10 बजे तक एकत्रित होती है, उसके बाद चरवाहा के द्वारा जंगल में चराने के लिए ले जाया जाता है, दिनभर में करिबन 10 किलोमीटर का जंगल भ्रमण कर वापस अपने-अपने घर इससे चरवाहा को रोज़गार भी मिलता है, दूसरा गौवंश संरक्षित एवं सुरक्षित रहती है, ऐसे ही व्यवस्था से गौवंश की रक्षा की जा सकती है.

Posted on: Nov 13, 2019. Tags: MOHAN YADAV NARAYANPUR CG

View Older Reports »

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download