गोंडी समाज और गोंडी भाषा की उत्थान हेतु लम्बे समय से प्रयासरत है...

भोला बघेल जी गोंडवाना समाज के दो बुद्धिजीवी समाजसेवी शेर सिह आचला और पूर्व शिक्षक पिलसाय पटावी जी से बातचीत कर रहे है,बातचीत में जिक्र है ये दो साथी ऐसे साथी है जो गोंडी समाज और गोंडी भाषा की उत्थान हेतु लम्बे समय से प्रयासरत है,पटावी जी नारायणपुर से लगे क्षेत्रो का सर्वप्रथम गोंडी ब्याख्यान लिखे थे जिसका प्रकाशन लोक कला मंच बिलासपुर से प्रकाशन हुवा जो काफी सराहनीय कार्य रहा,पटावी जी सेल टेक्स अधिकारी के रूप में भी सरकार में योगदान दिए और वर्तमान में रिटायर होकर समाज कल्याण को हेतु काम कर रहे है ...

Posted on: Jul 11, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL

सरकार की मदद से स्वसहायता समूह चलाकर अपना जीवन यापन करते हैं...

ग्राम-गढ़बेंगाल, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से लछंदी हुसेंडी, सुगाय सोरी, निरबती मंडावी बता रही हैं| वे अपने साथियों के साथ स्वसहायता समूह चलाती हैं| जिसमे वे होटल का काम करते हैं| उसी से अपनी जीविका चलाते हैं| समूह में 11 सदस्य हैं| 6 साल वे काम कर रहे हैं| ये काम उन्होंने सरकार की मदद से शुरू किया था| और वे काम आगे बढ़ा रहे हैं| सभी अपने काम से खुश हैं|

Posted on: Jul 07, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR STORY

बादरी धातरी चरया-चरया पानी आये...हल्बी गीत-

ग्राम-ककनार, विकासखण्ड-दरभा, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल हल्बी बोली में एक गीत सुना रहे हैं :
बादरी धातरी चरया-चरया पानी आये-
बादरी धातरी करया-करया पानी आये से-
देखा देखी चो मन चो मंजूर नाचे गाये से-
डोंगरी भीतरे हुआ-हुआ कोलया गागे से-
देखा देखी चो मन चो मंजूर नाचे गाये से-
डोकरी बहू डोकरा दादा के कहानी सुनाय से

Posted on: Jul 07, 2019. Tags: BASTAR BHOLA BAGHEL CG SONG

आदिवासी समुदाय के लोग शिकार के लिये धनुष और गुलेल का उपयोग करते हैं...

ग्राम-चिन्नार, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल ग्रामवासी बृजेश यादव, नट्टू, दिनेश, कंडी बता रहे हैं| वे वनों में जाकर पछियों का शिकार करते हैं| चूहों का शिकार करते हैं| इसके लिये धनुष और गुलेल का इस्तेमाल करते हैं| आदिवासी ग्रामीण शर्दी, गर्मी, बरसात सभी समय शिकार करते हैं| वे ग्रुप बनाकर शिकार करने जाते हैं|

Posted on: Jul 06, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR STORY

बांस की चीजें बनाने की कला लोगों के जीविका का साधन और पहचान है...

ग्राम-देवगांव, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से भोला बघेल गाँव के निवासी मनीष कुमार बाद्रा से चर्चा कर रहे हैं| मनीष बता रहे हैं| वे बांस की चीजें बनाने का काम करते हैं| सजावट का सामान बनाते हैं| और उसे बेंच कर अपनी आजीविका चलाते हैं| वे 20 वर्ष से ये काम कर रहे हैं| अपनी बनाई चीजों को वे शहरों तक पहुंचाते हैं| जैसे हैदराबाद, मुंबई, बैंगलोर आदि| बांस की चीजें बनाने के लिये कारीगर नये लोगो को सिखाते हैं| इस तरह से ये कला उनके रोजगार का साधन और पहचान है|

Posted on: Jul 06, 2019. Tags: BHOLA BAGHEL CG NARAYANPUR STORY

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