तुझसे त्रस है विश्व सारा...कविता-

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
तुझसे त्रस है विश्व सारा-
तू तो है कोरोना सबका हत्यारा-
बंद कराये विद्यालय बंद कराये दुकाने-
और क्या क्या गुल खिलायेगा न जाने-
हम सब आपस में मिलकर-
तुझे चित्त करेंगे सारे खाने-
संकल्प लिया है सर्व हारा-
तुझसे पायेंगे छुटकारा...

Posted on: Mar 25, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

घर में भूंजी भांग नहीं सुलताना मांगे जाय...कहावत-

जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व कहावत के माध्यम से संदेश दे रहे हैं,
“घर में भूंजी भांग नहीं सुलताना मांगे जाय” अर्थात घर में पैसो की तंगी है और बाहर पैसो का दुरुपयोग हो रहा है, आज के समय में कुछ ऐसा ही हो रहा है, बच्चे घर की स्थिती को समझते नहीं हैं और पैसे लेकर फिजूल खर्च करते हैं|

Posted on: Mar 25, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

23 मार्च शहादत दिवस पर संदेश...

आज के दिन 23 मार्च 1929 को देश भक्त राजगुरु, सुखदेव और सरदार भगत सिंह ने अपनी शहादत दी थी, उन्हें अंग्रेजो फांसी ने दी थी उन्होंने हँसते हुये फांसी को गले लगा लिया था क्यों कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी और एक दिन देश आजाद हो जायेगा और आज वो दिन आ चुका हैं, इसी साथ एक कविता प्रस्तुत है:
जन मानस तुमको पूजेगा सदियों तक बेसुमार-
फांसी चढ़कर कर कर दिया तुमने देश का उद्धार-
तो उन्हें सत सत नमन उन्ही के वजह से आज देश में है अमन...

Posted on: Mar 23, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON VIRENDRA GANDHARV

आया वायरस कोरोना...गीत-

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गंधर्व कोरोना वायरस पर एक गीत सुना रहे हैं:
आया वायरस कोरोना-
देखो आया वायरस कोरोना-
किसी को सर्दी, खासी, ज्वर हो-
साँस लेना भी दूभर, साँस लेना भी दूभर-
व्यर्थ समय न खोना जल्दी डॉक्टर को दिखाना-
हो जरुरी बाहर जाना-
सभा कही न बड़ी जुटाना, साबुन से हाथ धोना...

Posted on: Mar 20, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON SONG VIRENDRA GANDHARV

बुद्धि का उपयोग नहीं करने से इंसान जो मिलने वाला होता है उसे खो देता है...कहानी

एक समय की बात है जब दिल्ली में सिराजुदौला का शासन हुआ करता था, उनके राज्य में एक ब्राम्हण था जो बहुत गरीब था, उसको भीख मिलती नहीं थी तो एक दिन उसकी पत्नी ने कहा सिराजुदौला के दरबार में जाओ और कहना “जिसको न दे मौला उसको दे सिराजुदौला” ब्राम्हण ऐसा ही किया और जाकर राजा के दरबार में बोलने लगा, ये सुनकर राजा बहुत खुस हुये और उसको पास बुलाकर एक तरबूज दे दिया, तो उसने सोचा राजा सोना चांदी देने के जगह ये क्या दे दिया और उसको रास्ते में एक राही को दे दिया और पूछने पर बताया राजा ने दिया है तो राही डर गया और उस तरबूज को दरबार में लेकर दे दिया, राजा ये देखकर बोला मैंने तो ब्राम्हण को मालामाल करने के लिये तरबूज दिया था लेकिन उसने इसकी कीमत नहीं समझी, वास्तव में तरबूज के अंदर हीरे मोती थे, कहानी का तात्पर्य है इंसान कई बार अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करता और जो मिलने वाला होता है उसे खो देता है|

Posted on: Mar 18, 2020. Tags: CG RAJNANDGAON STORY VIRENDRA GANDHARV

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