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पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना...रचना -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार राजेश चौधरी की रचना सुना रहे है:
पापा मुझको वीर भगत या खुदीराम बना दो ना-
आजादी के लिए मरुंगा मैं-
मुझे शहीद बनादो ना-
कास मुझे भी फाँसी मिलतीं-
कालापानी मुझको मिलता-
कहलाता मैं वीर सेनानी-
यह हक मुझे दिलादो ना-
आंग्रेज़ो को मार भगाता-
गोरों पर आतंक मचाता-
सीना में बारूद छूपाये-
दुश्मनों का महल उड़ाता-
ऐसा सबक सिखादो ना-
धरती माँ के काम मैं आउ-
दुश्मन को मैं मार गिराऊं-
वह ब्रामस्त्र दिलादो ना – देश के खातिर मेरे सर को-
सीमा पर चढ़ा दो ना-
चंद्रशेखर आजाद हमारे-
पुण्यभूमि को प्राप्त हुये-
राजगुरू और बिश्मिलाखां-
हँसते हँसते प्राण दिए-
मैं भी चाहू उनसा बनना-
पापा मुझे बना दो ना...

Posted on: Jan 18, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

बेहतरी की उम्मीद का पर्व, मकर संक्रांति...

निराशा में तिल–तिल आशा भरने के उल्लास का पर्व है मकर संक्रांति। हमारे वैदिक मान्यताओं में इसी दिन से सूर्य उत्तरायण में जाता है। हमारा पूरा जीवन बस इसी उम्मीद पर टिका होता है कि हमारा आने वाला कल आज से बेहतर होगा। यह बेहतरी की उम्मीद का पर्व है। इसीलिए यह महापर्व है। तिल प्रतीक है ‘सूक्ष्मता के बावजूद बेहद असरकारी होने का’। इसीलिए मकर संक्रांति के दिन तिल और गुड़ के दान का चलन है। इसके सेवन से हर प्रकार की बीमारी दूर होती है। आईए हम सब मिलकर तिल -तिल आशा का उल्लास जगाएं,ताकि वहां से एक नया सवेरा हो. सुनील कुमार@9308571702

Posted on: Jan 16, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

क्यों इतना लाचार आदमी...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मुन्ना गुरु की रचना सुना रहे है:
क्यों इतना लाचार आदमी-
आज हुआ बेजार आदमी-
कितना नीचे और गिरेगा-
बिकने को तैयार आदमी-
पैरों तले जमीन नहीं है-
उड़ता पंख पसार आदमी-
मौत धड़ल्ले बाँट रहा है-
जीवन का हकदार आदमी-
काट रहा है अपनी ही जड़-
खुद लेकर तलवार आदमी...

Posted on: Jan 15, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुनील तेलामरी की रचना सुना रहे है:
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो-
कभी लाचार और बेबस के दिल में रोज उठती पीर को देखो-
यहां दो वक्त की रोटी की चिंता में गुजरते दिन-
गरीबी, भूख,महंगाई से जकड़ी जुल्म की जंजीर को देखो-
चलो ये माना हमने साइबर युग आ गया है-
मगर कोई बदल पाया नही, इंसान की तक़दीर को देखो-
तेरे ऊँचे महल ये शानो-शौकत इनके दम से है-
फनाह हो जाएगी ये सल्तनत है, आ में तासीर को देखो-
कभी तो इंडिया को भूलकर भारत की तस्वीर को देखो...

Posted on: Jan 14, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

सुबह जागिये, कह रही हैं हवाएं, मुझ जैसी न होती कोई भी दवाएं...कविता-

मालीघाट मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार महेश ठाकुर चकोर की एक रचना सुना रहे हैं जिसमे कहा गया है कि सुबह जागने से बहुत फायदा मिलता हैं:
सुबह जागिये कह रही हैं हवाए-
मुझ जैसी न होती कोई भी दवाएं-
सुबह जागिये कह रही हैं हवाए-
सूरज की किरणें बुलाने हैं आई-
विटामिन c देखो लुटाने हैं आई-
विटामिन c हड्डी को बलवान बनाये-
सुबह जागिये कह रही हैं हवाएं...

Posted on: Jan 13, 2018. Tags: SUNIL KUMAR

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