जय-जय भैरवी असुर भयावनी...गीत-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
जय-जय भैरवी असुर भयावनी, पशुपति बा मुनि माया-
सहज सुमति वर दियय गोसावनी, अनुगति गति तू अपाया-
बासरी राना सवासन कोभित, चरन चंद मणि चुरा-
कतऊ कदैत मारी मुव में लली, सामर बरन नयन अनुरंगि-
जलद जोद फुलकोता, कट कट विकट ओट पुटपयवी-
लिदुर फेन उठ फोका, घन घन घनन घुघरू कती बाजे-
हन हन करतु अकाता, विद्या कवी पती तुवापद सेवक ...

Posted on: Aug 23, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया...होली गीत-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक होली गीत सुना रहे हैं:
परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया-
चार महिना के गर्मी लगत है-
कहिया ला सूत के डोलके बेनिया-
चार महीना बूंद परत है-
कहिया न सूत के खेला के बंगला-
चार महीना जार लगत है...

Posted on: Aug 22, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...गज़ल-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर(बिहार) से सुनील कुमार कवि महेश कटारे सुगम जी की एक गजल सुना रहे हैं :
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है-
जीवन ये बोझिल करने को दुःख के पानी खाद बहुत हैं-
बिना जरूरत कुछ लोगो पर बड़े-बड़े परसाद बहुत है-
न्याय बना है मृग-मरीचिका करने को फरियाद बहुत है-
आम आदमी के जीवन में भरे हुए अवसाद बहुत है-
दुःख-दर्दों की भीड़-भाड में जीने का अलहाद बहुत है-
इन्कलाब जब तक ना आये अपने जिंदाबाद बहुत है-
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...

Posted on: Aug 21, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SUNIL KUMAR

सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया... बारामासा गीत

परावपोखर, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से रम्भा देवी से एक बारामासी गीत सुना रही हैं :
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया-
सखी सब झूला झुलाला-
पिया बिन कछु न सुहाला-
द्वारा के संगे हम गईनी बजरिया-
झुमका-बेशहानी गिननी चुनरिया-
पहिने से जिया घबडाला-
गावं के पछि मा एक टूठी रे पिपरवा-
वई पर बईठ कववा सगुनिया-
सगुन के बोलिया सुनाला-
पिया मोर चिठिया पठाला-
रतिया के ट्रेन से पिया मोर अवथिन-
खोलथिन केवरिया जिया देरावथिन-
पिया मोरा आज मोरा सबकुछ सुहाला-
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया...

Posted on: Aug 20, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ की एक नृत्य कला : कठसाठ -

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार छत्तीसगढ़ में होने वाले नृत्य कला के विषय में जानकरी दे रहे हैं| भारत में हर जगह अलग-अलग नृत्य कला के प्रकार हैं| इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में अबूझमांड में होने वाली नृत्य कला कठसाठ इन्ना इनमे से एक है इसमें युवक व युवतियां माघ के पर्व में नाचते हैं| कठसाठ कसना से बना है| कसना का अर्थ खेलना होता है| जिसमें ख़ुशी से देवी-देवता नाचते या खेलते हैं| जिसे कठसाठ कहते हैं| गोंडी में इसे माडी कठसाठ इन्ना कहते हैं| युवक कमीज, कोट, बनियान, पंख, दर्पण, भूतमाला माला पहनते हैं, कौड़ी माला व पंख युतिया पहनती है| जो बहुत जयादा प्रभावित होने पर प्रेम सूत्र में भी बंध जाते हैं| सुनील कुमार@9308571702.

Posted on: Aug 16, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR STORY SUNIL KUMAR

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