भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...कविता-

छिंदगढ़, जिला-सुकमा (छत्तीसगढ़) से मनीश कुमार कुंजामी एक देश भक्ति कविता सुना रहे हैं :
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के-
धर्म अलग हो जाती अलग हो-
वर्ग अलग हो भाषा एक-
पर्वत, सागर, तट, वन मरुस्थल से हम आये-
फ़ौज वर्दी में हम सबसे पहले हिंदुस्तान के-
भारत माता के बेटे हम चलते सीना तान के...

Posted on: Aug 20, 2019. Tags: CG MANISH KUMAR POEM SUKAMA

सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया... बारामासा गीत

परावपोखर, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से रम्भा देवी से एक बारामासी गीत सुना रही हैं :
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया-
सखी सब झूला झुलाला-
पिया बिन कछु न सुहाला-
द्वारा के संगे हम गईनी बजरिया-
झुमका-बेशहानी गिननी चुनरिया-
पहिने से जिया घबडाला-
गावं के पछि मा एक टूठी रे पिपरवा-
वई पर बईठ कववा सगुनिया-
सगुन के बोलिया सुनाला-
पिया मोर चिठिया पठाला-
रतिया के ट्रेन से पिया मोर अवथिन-
खोलथिन केवरिया जिया देरावथिन-
पिया मोरा आज मोरा सबकुछ सुहाला-
सावन बरसे भादों गरजे बहे पुरवैया...

Posted on: Aug 20, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

गोडे के पईरी बनाऊ गलिया रे...गीत-

ग्राम-घोड़ूपानी, पंचायत-गोरगी, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से राजकुमारी और धनिया एक डोमकच्छ गीत सुना रहे हैं:
गोडे के पईरी बनाऊ गलिया रे-
जीरा घर घर न आवे-
गोडे के पईरी बनाऊ गलिया रे-
जीरा घर घर न आवे...

Posted on: Aug 19, 2019. Tags: CG PRATAPPUR RAJKUMARI SONG SURAJPUR

तीर सहेंगे हम बेचारे...कविता-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार श्याम अंकुर की रचना सुना रहे है :
तीर सहेंगे हम बेचारे-
बोलो कब तक बोलो कब तक-
कितनी सदियाँ बीत गयी पर-
जुल्म अभी भी जारी है-
घाव भरे हैं तब से अब तक-
आके के अब बेकारी है...

Posted on: Aug 18, 2019. Tags: BIHAR KUMAR MUZAFFARPUR POEM SUNIL

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ की एक नृत्य कला : कठसाठ -

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार छत्तीसगढ़ में होने वाले नृत्य कला के विषय में जानकरी दे रहे हैं| भारत में हर जगह अलग-अलग नृत्य कला के प्रकार हैं| इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में अबूझमांड में होने वाली नृत्य कला कठसाठ इन्ना इनमे से एक है इसमें युवक व युवतियां माघ के पर्व में नाचते हैं| कठसाठ कसना से बना है| कसना का अर्थ खेलना होता है| जिसमें ख़ुशी से देवी-देवता नाचते या खेलते हैं| जिसे कठसाठ कहते हैं| गोंडी में इसे माडी कठसाठ इन्ना कहते हैं| युवक कमीज, कोट, बनियान, पंख, दर्पण, भूतमाला माला पहनते हैं, कौड़ी माला व पंख युतिया पहनती है| जो बहुत जयादा प्रभावित होने पर प्रेम सूत्र में भी बंध जाते हैं| सुनील कुमार@9308571702.

Posted on: Aug 16, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR STORY SUNIL KUMAR

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