छोटानागपुर गीत : ऊँचा निचा पहाड़ पर्वत, नदी नाला...

जिला-मुंगेर (बिहार) से दीपक कुमार एक नागपुरिया गीत सुना रहे है:
ऊँचा निचा पहाड़ पर्वत, नदी नाला-
हाय रे हमर छोटा नागपुर-
काले धुए ने गेले संगी-
काले छुवेरे ने गेले संगी भाषा मुगोटा-
हरी हरी चाय, के बागान-
मोरे चुनर छोटा नागपुर-
बन जंगल कतई सुंदर सरह फूल फूलेला-
ऊँचा निचा पहाड़ पर्वत-
नदी नाला वो, ये है हमर छोटा नागपुर...

Posted on: Nov 21, 2019. Tags: BIHAR DEEPAK KUMAR SONG

हिमालय की गुफाओं से यही आवाज आती है...देशभक्ति गीत-

जिला-मुंगेर, प्रखण्ड-असरगंज (बिहार) से दीपक कुमार एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं:
हिमालय की गुफाओं से यही आवाज आती है-
ये धरत किसकी खून से आज लाल हो गई-
जागो नव जवान, जागो नव जवान-
देश आज जाग उठा है वक्त की आवाज से-
दिल भी आज दहल उठा शेर की दहाड़ से-
कितनी माँ की लाल इस धरा पे मिट गये-
नापाक इस धरा पे किसके पैर आ पड़े-
जागो नव जवान जागो नव जवान...

Posted on: Sep 15, 2019. Tags: BIHAR DEEPAK KUMAR MUNGER SONG

जय-जय भैरवी असुर भयावनी...गीत-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
जय-जय भैरवी असुर भयावनी, पशुपति बा मुनि माया-
सहज सुमति वर दियय गोसावनी, अनुगति गति तू अपाया-
बासरी राना सवासन कोभित, चरन चंद मणि चुरा-
कतऊ कदैत मारी मुव में लली, सामर बरन नयन अनुरंगि-
जलद जोद फुलकोता, कट कट विकट ओट पुटपयवी-
लिदुर फेन उठ फोका, घन घन घनन घुघरू कती बाजे-
हन हन करतु अकाता, विद्या कवी पती तुवापद सेवक ...

Posted on: Aug 23, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया...होली गीत-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक होली गीत सुना रहे हैं:
परदेसिया के नारी सदा सुखिया परदेसिया-
चार महिना के गर्मी लगत है-
कहिया ला सूत के डोलके बेनिया-
चार महीना बूंद परत है-
कहिया न सूत के खेला के बंगला-
चार महीना जार लगत है...

Posted on: Aug 22, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SONG SUNIL KUMAR

करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...गज़ल-

ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर(बिहार) से सुनील कुमार कवि महेश कटारे सुगम जी की एक गजल सुना रहे हैं :
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है-
जीवन ये बोझिल करने को दुःख के पानी खाद बहुत हैं-
बिना जरूरत कुछ लोगो पर बड़े-बड़े परसाद बहुत है-
न्याय बना है मृग-मरीचिका करने को फरियाद बहुत है-
आम आदमी के जीवन में भरे हुए अवसाद बहुत है-
दुःख-दर्दों की भीड़-भाड में जीने का अलहाद बहुत है-
इन्कलाब जब तक ना आये अपने जिंदाबाद बहुत है-
करने को सवांद बहुत है, भरने को उन्माद बहुत है...

Posted on: Aug 21, 2019. Tags: BIHAR MUZAFFARPUR SUNIL KUMAR

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