जीवन सुधर गया...काहानी-

मुंबई से दूर गाँव में एक किसान रहता था| जिसका नाम किसनलाल था| उसका एक लड़का था| नाम बिसनलाल था| वह सुंदर और होशियार था| हाल ही में उसने बारहवीं कक्षा पास किया था| एक दिन उसने अपने दोस्तों के साथ मुंबई देखने जाने का प्लान बनाया| सभी ने अपने माता-पिता जाने के लिये पूछा| घर वालों ने मना किया| तब सभी बिना बताये अपने-अपने घरों से पैसे चुरा कर, टिकट कटाकर मुंबई पहुंच गये| स्टेशन में लोगों की भीड़ में बिसनलाल अपने साथियों से बिछड़ गया| वह अपने साथियों को ढूंढा लेकिन वे नहीं मिले| वहां उसे एक साथी मिला| उसने बिसनलाल को काम दिला में दिया| उसे रहने के लिए जगह भी मिल गया| इधर उसके साथी गाँव वापस आ गये| बिसन के माता-पिता उसके बारे में पूछने लगे| बच्चो ने बताया साथ में गये थे लेकिन वह स्टेशन में हमसे बिछड़ गया| ये सुनकर उनके माता-पिता बहुत रोये और कुछ वर्ष बाद उनका देहांत हो गया| एक दिन बिसन को अपने घर की याद आई और वह छुट्टी लेकर गाँव वापस आया| माता-पिता को न देख वह बहुत दुखी हुआ| वह अपने दोस्तों से मिला, सबका हाल पूछा| फिर अपना सब कुछ बेच कर, वापस चला गया| माता-पिता रहे, लेकिन जीवन सुधर गया|

Posted on: Jun 29, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

भोले बाबा भोले बाबा, बाबा तेरा ही सहारा है...भजन

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता एक भजन सुना रहे हैं:
भोले बाबा भोले बाबा, बाबा तेरा ही सहारा है-
बाबा जी के जटाओं में गंगा की धारा है-
बाबा जी के गलों में सर्पों की माला है-
बाबा जी के कमरों में मृगा की छाला है-
बाबा जी के हाथों में डमरू और त्रिशूल है-
भोले बाबा भोले बाबा, बाबा तेरा ही सहारा है...

Posted on: Jun 06, 2019. Tags: CG RAIGARH RAJENDRA GUPTA SONG

हरी ने हरी को चर गया, कि हरी गया हरी पास...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कविता सुना रहे हैं :
हरी ने हरी को चर गया, कि हरी गया हरी पास-
की हरी को देख हरी भाग गया, कि हरी मन हुआ उदास-
हरी देख हरी पास गया, हरी मन हो गया उल्लास-
हरी देख हरी ने सूत गया, हरी मन हो गया उदास-
हरी ने हरी को ले उड़ा, हरी गया समंदर पार-
हरी ने हरी से जा भिड़ा, हरी ने हरी का किया उद्दार-
हरी देख हरी गया हरी के पास, हरी को हरी न मिला...

Posted on: Jun 05, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
चल न दीदी जाबो वो जंगल पथरा झाड-
अडबड तेंदू चार पके हवे, झन कर तय बिचार-
पान मुखारी तोड़ आन बो, बेटी के हवय सगाई-
पतरी दोना खील डार बो, अडबड हवय मंगाई-
बेटी के सगाई मा, आहीं लोग लुगाई-
ओकर खातीर कहाथो वो, झन कर तय ठागुवाई...

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH

बड़ो का अपमान और बेकार का अहंकार नहीं करना चाहिये...कहानी-

एक समय की बात है कलिंग राज्य में मकरध्वज नाम का एक अहंकारी राजा राज्य करता था| उसका कोई संतान नहीं था| एक बार उसके राज्य में दुर्वासा ऋषि आये| उन्होंने अपने आने का संदेश राजा के पास भेजा| राजा अहंकार वस उसके स्वागत के लिए नही आया| दरबारी से बोला ऋषि से कहो महाराज बुला रहे हैं| दरवारी ने वैसा ही किया| ऋषि ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर राजा को श्राप दिया| दुष्ट राजन मैंने तुम्हे स्वागत के लिये संदेश भेजा, लेकिन तुम नहीं आये| मै श्राप देता हूँ, तुम्हारे राज्य में 12 वर्ष तक वर्षा नहीं होगी| ये सुनकर राजा को पछतावा हुआ| वह तुरंत ऋषि के पैर पकड़कर बोला ऋषिवर मुझसे भूल हुई, माफ़ करें| आपका श्राप वापस लें| ऋषि बोले धनुष से निकला बाण वापस तरकश में नही जाता| बहुत बार विनती करने पर ऋषि को उस पर दया आ गया| वे बोले अपने राज्य में यज्ञ करो, गरीबो को दान करो| इससे श्राप ख़त्म हो जायेगा| राजा ने वैसा ही किया और उसका राज्य श्राप मुक्त हो गया| इस तरह उसका अहंकार खत्म हो गया|

Posted on: Jun 04, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH STORY

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