क्यों समझते हो खुद को कमज़ोर मज़दूरों...

क्यों समझते हो खुद को कमज़ोर मज़दूरों
अपनी ताकत पर तुम करो गौर मज़दूरों
सृष्टि में तुम सूर्य की पहली किरण हो
रोशनी का तुम सुनहरा भोर मज़दूरों
काम रूपी घंटी का तुम गूँज हो
विकास रूपी पूजा का तुम एक ठौर मज़दूरों
धर्म दर्शन ज्ञान की उड़ती पतंगे
इन पतंगों की तुम्ही हो डोर मज़दूरों
तुम रहो चौकस तो बिलकुल ना बनेगी
शोषक रूपी भेड़ियों का कौर मज़दूरों
राह में ठोकर लगे हिम्मत न हारो
फिर करो कोशिश कोई पुरज़ोर मज़दूरों

Posted on: May 03, 2020. Tags: BHAGIRATHI VERMA

सुधा भारद्वाज हमारी वकील, सामाजिक कार्यकर्ता को मदद नहीं कर सकते तो उनको बदनाम न करें...

भागीरथी वर्मा रायपुर छतीसगढ़ से बता रहे है सामाजिक कार्यकर्ता सह वकील सुधा भारद्वाज को पूना पुलिस द्वारा 28 अगस्त 2018 को दिल्ली से उन्हें माओवादी बताकर गिरफ्तार किया गया है l सुधा भारद्वाज एक सामाजिक कार्यकर्ता है जो गरीब मजदूर आदिवासियो के लिए न्यायालयों में मुक़दमे लड़ते आ रही है पूंजीपतियो के खिलाफ,साथ ही वे छत्तीसगढ़ PUCL की महासचिव भी है l मजदूरो के हित में उन्होंने लेबर कोर्ट दुर्ग, बिलासपुर हाईकोर्ट में मजदूरो के पक्ष में मुकदमा लड़ कर जीत दिलाई है और मजदूरो को काम में वापस लौटाया है, ऐसे सामाजिक लोगो के विरुद्ध सरकार काम कर रही है जिसकी हम निंदा करते है और सरकार के काम का विरोध करते है और जब तक उनको रिहा नहीं किया जायेगा तब तक विरोध जारी रहेगा l

Posted on: Aug 30, 2018. Tags: BHAGIRATHI VERMA BHARDWAJ CG RAIPUR SUDHA

कितना शर्म की बात है....कविता

रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
मुट्ठीभर लोग कुर्सी पर बैठकर-
देश में असहिष्णुता फैला रहे हैं-
गोमांस, सांप्रदायिक सौहार्द्र की बात करते हैं-
शिक्षा के भगवाकरण पर जोर दे रहे हैं-
अपना वेतन ढाई लाख और देश का विकास करने वाले-
मजदूरों का वेतन पांच हजार लगा रहे हैं-
कितना शर्म की बात है-
और तो और छत्तीसगढ़ की जनता को अनपढ़ रहने के लिए-
तीन हजार स्कूल बंद कर दिए-
आज की सरकार से अच्छा तो अंग्रेज था-
जो जनता को शिक्षित करने खातिर स्कूल खोला था-
जनता का शोषण करने आप अंग्रेज से भी आगे निकल गए-
वक्त है संभल जाओ ! नहीं तो आपका भी वही दुर्दशा होगा-
जो वर्षों पहले अंग्रेज का हुआ था-
अंग्रेज भी गोले बन्दूक पर विश्वास करते थे-
और आप भी गोली-बन्दूक पर विश्वास करते हैं-
आज समय है देशवासियों के लिए ऊँचा सोचने का-
समस्या का समाधान करने का न कि फूट डालो और राज करने का...

Posted on: May 28, 2018. Tags: Bhagirathi Verma

भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था...कविता

भागीरथी वर्मा, रायपुर, छतीसगढ़ से हैं. छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अभी हाल ही में वीर नारायण सिंह का शहादत दिवस मनाया गया है. उसी सन्दर्भ में एक कविता का प्रस्तुत कर रहे हैं:
छतीसगढ़ के सोनाखान में, इंक़लाब का बिगुल बजाया था
भूखे-मजदूर-किसानों के लिए, वीर नारायण सिंह ने अपना खून बहाया था
सन 1856 के अकाल में
भूख से बिलखते, गरीब-किसानों के जीवन की रक्षा में
अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चलाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
सोये हुए आदिवासियों को, उस वीर ने जगाया था
बेईमानों को ललकारा था
ऐ लुटेरे ! तू खाली हाथ आया है, अब खाली हाथ ही जाएगा
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
जन आंदोलन देखकर, मक्कारों ने घबराया था
राजद्रोही बनाकर उस वीर को, जेल में ठूंसवाया था
जल्लाद अंग्रेज ने भी उस वीर के साथ, कैसा दुर्व्यवहार रचाया था
बीसों नाख़ून खींचकर, उँगलियों को लहू-लुहान बनाया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...
10-दिसंबर-1857 का, वह मनहूस दिन भी आया था
देश के गद्दारों ने जयस्तंभ चौक पे, उस वीर को फांसी पर लटकाया था
उस वीर के शहीद होने से, छत्तीसगढ़ के धरती में मातम सा पसराया था
छतीसगढ़ के सोनाखान में...

Posted on: Dec 15, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

अधिकतर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं...एक कविता

जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ से भागीरथी वर्मा जी, जो एक मजदूर हैं साओजी भाई ढ़ोलकिया पर एक एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं जिन्होंने इस बार दीवाली में अपने कर्मचारियों को खूब बोनस बांटा है और हाल में अखबारों में छाए रहे हैं :
चौथी पढ़े साओजी भाई ढ़ोलकिया का, दरिया दिल का क्या कहना
शायद यूनिवर्सिटी में पढ़कर आता, तो मैं इतना बोनस नहीं बाँट पाता
मै जो हूँ, कर्मचारियों के मेहनत से, ऐसे में मुनाफा अकेले कैसे पचा पाते
प्यारे-बेचारे अपने कर्मचारियों के बोनस में, फ्लैट-कार और हीरे के आभूषण बाँटे
ऐसा मुझे लगता है, ऐसा मुझे लगता है
अधिकतर यूनिवर्सिटी में, पढ़ने वाले शोषक बन जाते हैं
मजदूरों की गाढ़ी कमाई, अकेले ही डकार जाते हैं...

Posted on: Oct 27, 2014. Tags: Bhagirathi Verma

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