छेल छबीली फागुनी मन बना मकरन...फागुन गीत

ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ पी एस पुष्प एक फागुन गीत सुना रहे है:
छेल छबीली फागुनी मन बना मकरन-
ढोल मंजीरे दादरा बजे ह्रदय में छन-
मौसम ने पाति लिखी उड़ा गुलाबी रंग-
पात-पात फागुन दरे उत्सव वाले छन-
फुगुनाहट से भरे गई मस्ती भरी उमंग-
रोला ठुमरी दादरा लगे तिरतने अन-
फागुन आयो रे सखी फूल में उडी सुगन्ध-
भौराया मन वहां से नेह सितयन वन...

Posted on: Mar 09, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

यान उड़ गया यान उड़ गया, अन्तरिक्ष में यान उड़ गया...कविता

ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ. पी एस पुष्प एक कविता सुना रहे है:
यान उड़ गया यान उड़ गया-
अन्तरिक्ष में यान उड़ गया-
चम-चम-चम-चम, चाँदी जैसे-
सर्र-सर्र-सर्र-सर्र यान उड़ गया-
यान उड़, यान उड़-
अन्तरिक्ष में यान उड़ गया-
धरती से ऊपर की दुनिया-
बड़ी सलोनी है रे मुनिया-
वहीं दृश्य दिखलाने हमको-
दूर गगन में यान उड़ गया-
यान उड़, यान उड़-
अन्तरिक्ष में यान उड़ गया...

Posted on: Mar 06, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

जंगल ये सुंदर घने जंगल धू-धू कर जल रहा है...जंगल पर कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉक्टर पीएस पुष्प एक कविता सुना रहे है:
जंगल ये सुंदर घने जंगल धू-धू कर जल रहा है-
छोटे बड़े हरे भरे, झाड़िया जलकर, खाक हो रहा है-
आग की लपटे, बढ़ रही है, चहु दिशाए-
तबाह कर रही है,दिनों दिन-
पशुओ के वसेरा, खाने को कहा है भोजन-
पीने को पानी भी नही बचा जीवन, नर्क सा हो गया-
अब नही है जीवन का आसरा ये वन्य जीवों के सम्मुख-
कैसा संकंट घिर रहा है जंगल ऐ सुंदर घने जंगल-
धू-धू कर जल रहा है...

Posted on: Mar 04, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

अपनापन की भावना से ओत-प्रोत आत्मा की पुकार...कविता

ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ पी एस पुष्प एक कविता सुना रहे है:
अपनापन की भावना से ओत-प्रोत आत्मा की पुकार-
कह रही है हमे जग अपना है तुम सबके हो कुमार-
किसे कहते हो तुम अपना सभी तुम्हारे अपने है-
भावना अपनापन की मत खोना यही तुम्हारे सपने हैं...

Posted on: Mar 03, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

बादर हरे घुमर-घुमर बजावत है ढोल...छत्तीसगढ़ी गीत

ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ. पी एस पुष्प एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे है:
बादर हरे घुमर-घुमर बजावत है ढोल-
जेकर संग सूरज गलो खेलत है पिबोर-
राय-राय करती रही चुडावत है गाम-
चलो नरुहा पीरे म पाके हवे जाम...

Posted on: Mar 03, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

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