जंगल ये सुंदर घने जंगल धू-धू कर जल रहा है...जंगल पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉक्टर पीएस पुष्प एक कविता सुना रहे है:
जंगल ये सुंदर घने जंगल धू-धू कर जल रहा है-
छोटे बड़े हरे भरे, झाड़िया जलकर, खाक हो रहा है-
आग की लपटे, बढ़ रही है, चहु दिशाए-
तबाह कर रही है,दिनों दिन-
पशुओ के वसेरा, खाने को कहा है भोजन-
पीने को पानी भी नही बचा जीवन, नर्क सा हो गया-
अब नही है जीवन का आसरा ये वन्य जीवों के सम्मुख-
कैसा संकंट घिर रहा है जंगल ऐ सुंदर घने जंगल-
धू-धू कर जल रहा है...
