फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना...कविता

ग्राम-सालकट्टा, पंचायत-गोंडदिनापाल, विकासखण्ड-अंतागढ, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से फातिमा विनीता एक कविता सुना रही हैं:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो-
शीश झुकाना, सीख हवा के झोको से लो-
कोमल भाव बहाना, दूध तथा पानी से सीखो-
मिलना ओर मिलाना,सूरज की किरणों-
से सीखो जगना ओर जगाना-
लता और पेड़ो से सीखो सबको गले लगाना...

Posted on: Aug 17, 2018. Tags: FATIMA HINDI POEM KANKER CG VINEETA

माथ बन्नी के बेंदी सोहै, टीकों की बहार है...बघेली विवाह गीत

ग्राम-डभौरा, तहसील-जवा, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से विनीता बघेली भाषा में शादी के समय गाया जानेवाला गीत गा रही हैं:
नौ सौ कलियों का, बन्नी के गले हार है-
माथ बन्नी के बेंदी सोहै, टीकों की बहार है-
पहनों प्यारी बन्नी ! बन्ना तो फैशनदार है-
नौ सौ कलियों का-
कान बन्नी के झूमक सोहै, झाले की बहार है-
पहनों प्यारी बन्नी ! बन्ना तो फैशनदार है-
नौ सौ कलियों का-
हाथ बन्नी के कंगन सोहै, चूड़ियों की बहार है-
पहनों प्यारी बन्नी, बन्ना तो फैशनदार है-
नौ सौ कलियों का-
पैर बन्नी के पायल सोहै, बिछियों की बहार है-
पहनों प्यारी बन्नी, बन्ना तो फैशनदार है-
नौ सौ कलियों का...

Posted on: May 21, 2015. Tags: Vineeta Rewa

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