आशा का दीप हर दम, मन में जलाए रखना...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार युवा कवि श्रवण कुमार की एक कविता सुना रहे है :
आशा का दीप हर दम, मन में जलाए रखना-
बदलेगा फिर जमाना, हिम्मत बनाए रखना-
तूफ़ान क्या दरिया क्या, दीवार या पर्वत क्या-
बस अपने इरादों को, पत्थर बनाए रखना-
जब मौत हक़ीकत है, जब मौत है सच्चाई-
फिर मौत से क्या डरना, क्यों सर झुकाए रखना...

Posted on: May 30, 2017. Tags: SUNIL KUMAR

बुद्ध संग जो अधम पे जो शरणागत होए...बुद्ध के दोहे -

सुनील कुमार गिरीश पंकज द्वारा लिखित बुद्ध के दोहे सुना रहे हैं :
बुद्ध संग जो अधम पे जो शरणागत होए-
सत्संगति का फल मिले वह पापों को धोये-
पहले बस करुणा जगे फिर अन्तः का ज्ञान-
बिन इसके बनता नहीं नेक कोई इन्सान-
नहीं मिटा है वैर से ,कभी वैर दुष्कर्म-
शांति-स्नेह से मिले यही सनातन धर्म-
प्रेम-विजय हो क्रोध पर कंजूसी पर दान-
हारता सत्य से साधु से शैतान-
सत्य प्रेम और दान से मानव शुद्ध-
मनुजो में श्रेष्ठ कहते हैं यह बुद्ध-
बोले तो पहले करें, उस पर तनिक विचार-
ऐसे मितभाषी बने धरती के श्रृंगार-
रटने से क्या फायदा धरम-करम की बात-
अगर आचरण में रचा तो सच्ची सौगात...

Posted on: May 29, 2017. Tags: SUNIL KUMAR

ज़िंदगी ने बहुत सिखाया कभी हँसाया कभी रूलाया...कविता -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार किरण चावला की रचना सुना रहे हैं :
ज़िंदगी ने बहुत सिखाया-
कभी हँसाया कभी रूलाया-
वक़्त के हथौड़े खाकर-
हमें नेक इंसान बनाया-
हमने औरों का ग़म चुराया-
कोशिश की सबक़ों हँसाया-
फिर चाहे ख़ुद ग़म ही पाया-
दिल में बस सुकून तो आया...

Posted on: May 28, 2017. Tags: SUNIL KUMAR

गुनिरे पहरे नदिया किनारे चली आवे तीन बजे...सादरी प्रेम गीत -

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सादरी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं :
गुनिरे पहरे नदिया किनारे चली आवे तीन बजे-
एक असरा रे एक बुदहरा रे-
चली आवे गुइया मोरे से मिले-
लाल छपर साड़ी तोरे कीं आवे रे-
छुनुर-छुनुर पायल बजाते आवे रे-
गुनिरे पहरे नदिया किनारे चली आवे तीन बजे...

Posted on: May 27, 2017. Tags: SUNIL KUMAR

विधवा एक जिन्दा लाश, भारत की एक कुप्रथा : हमें अधिक विधवा विवाह का प्रयास करना चाहिए...

विधवा एक जिन्दा लाश: जब कोई महिला विधवा हो जाती है तो हमारा समाज ही उसकी दयनीय स्थिति के लिए परम्परा के नाम पर सबसे अधिक गुनहगार होता है जबकि दोष उस विधवा के ऊपर थोप दिया जाता है और उसकी सम्पूर्ण जिन्दगी को एक सफ़ेद कफ़न के साथ धकेल दिया जाता है इसका जिम्मेदार हमारा समाज ही है, हिन्दुस्तान की इस परंपरा को बदलना होगा ताकि विधवा भी अपनी जिन्दगी को एक नयी राह पर ला सके इसके लिए हमे विधवा के पुनर्विवाह के बारे में ऐसे कार्यक्रम करने होंगे और उन्हें एक नयी जिन्दगी देनी होगी, कह रहे हैं सुनील कुमार@9308571702 मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से. वे कह रहे हैं हमारा देश हर मामले में आगे जा रहा है हमारी विधवा बहने भी पीछे नहीं रहनी चाहिये। सुनील कुमार@9308571702

Posted on: May 25, 2017. Tags: SUNIL KUMAR

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