हे ते नाना मोर नानो रे, नानी न मोर नान हो...गोंडी पूजा गीत-

ग्राम-तोडहुर, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कविता कोरचा, सुस्मय कतलामी और सुंदरी दुग्गा एक गोंडी गीत सुना रहे हैं ये गीत पूजा के समय गाया जाता है :
हे ते नाना मोर नानो रे, नानी न मोर नान हो-
ती नाना मोर नानो रे, न नीना मोर नान-
दंतेश्वरी दाई ला काईन पूजा लागे हो-
दंतेश्वरी दाई ला दया दरकर लागे हो-
दंतेश्वरी दाई ला जोड़ा नरियर लागे-
सारुक लागे हो, साथ में तो नारियल दारु सेवा कारूक लागे...

Posted on: Aug 26, 2018. Tags: CHHATTISGARH GONDI SONG KANKER KAVITA KORCHA

हम महिला स्व सहायता समूह में प्रति माह 10 रू जमा करते हैं और उसको 2% माह ब्याज में देते हैं...

ग्राम-बेंदोरा, ब्लाक-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से कविता देवी इग्नासुस एक्का से बात कर रही हैं वे एक महिला स्व सहायता समूह उपवनफूल वाजिका सखी मंडल की सदस्य हैं, उनके समूह का एक कार्य साप्ताहिक 10 रुपए बचत करना है जो सभी सदस्य जमा करते हैं, और उसी पैसे से आवश्यकता पड़ने पर लोगो की मदद करना हैं, वे लोगो को उनके बुरे वक्त जैसे स्वास्थ्य खराब होने या किसी आपात कालीन स्थिति में मदद मांगने पर पैसे देते है, उसके एक महीने बाद प्रति 100 रुपए में 2 रुपए सेवा कर लगाकर वापस ले लेते हैं, इस प्रकार से उनको कुछ आय भी हो जाती है और लोगो की मदद भी हो जाती है | अभी तक उन्होंने इस जमा पैसे का और कोई उपयोग नहीं किया है जो भविष्य में करना चाहेंगे

Posted on: Jul 26, 2018. Tags: KAVITA DEVI

घने-घने वन कितने हैं, पर्वत कितने विशाल...कविता-

ग्राम-देवरी, पोस्ट+थाना-चंदोरा, तहसील+ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक कविता सुना रहे है:
घने-घने वन कितने हैं, पर्वत कितने विशाल-
बड़ी बड़ी यहां नदिया है, बड़ी-बड़ी यहां का खदान-
यह अपने हैं, न बन जओं धनवान-
विध्याचल पर्वत माला सतपुड़ा है, सीना तान-
नर्मदा की बहती धारा गोद वर्धा के गाने-
संपदा अपनी है यही हमारी शान...

Posted on: Jul 15, 2018. Tags: KAILASH SINGH POYA KAVITA

रेलगाड़ी करती छुक-छुक-छुक...बाल कविता

ग्राम-कुर्केल, पंचायत-रामपुर, प्रखंड-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) सान्या टोप्पो और सलमा कुमारी जो तीसरी और चौथी कक्षा की छात्राएं है वे लोग एक कविता सुना रहे हैं:
रेलगाड़ी करती छुक-छुक-छुक-
लम्बू कहता रुक-रुक-रुक-
डिब्बा कहता घुस-घुस-घुस-
लम्बू चढ़ गया छुक छुक छुक-
इंजान बोला फूक फूक-फूक-फूक-
गाडी चल दी छूक-छूक-छूक-
आगे थी एक भैंस खड़ी-
गाडी से वो नहीं डरी-
गाड़ी रुक गयी छु चल-
भैंस गिर पड़ा धम-धम-
लम्बू था नटखट उतर के-
भागा टिक-टिक-टिक-
आगे जा कर पकड़ा गया-
बिना टिकट के मजा आ गया...

Posted on: Jul 12, 2018. Tags: KAVITA SAANAYA TOPPO SALAMA KUMARI

सुन्दर और सजीला आम...बाल कविता

ग्राम-करकेटा पोस्ट-जोगा, थाना-उटारी रोड, जिला-पलामू (झारखण्ड) से अखिलेश कुशवाहा एक बाल कविता सुना रहे है:
सुन्दर और सजीला आम-
कितनी रंग रगीला आम-
सबके मन को भाता आम-
सबका जी ललचाता आम-
जिसने सूरज चाँद बनाया-
जिसने तारो को चमकाया-
जिसने बागो को महकाया-
जिसने सारा जगत बनाया-
आओ हम उनके गीत गुनगुनाये-
उसे प्रेम से शीश झुकाए...

Posted on: Jul 07, 2018. Tags: AKHLESH KUSHWAH KAVITA

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