लुटत हवे, लुटत हवे, लुटत हवे जी...गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
लुटत हवे, लुटत हवे, लुटत हवे जी-
सरकार हर लुटत हवे राशन जी-
बदल बदल के संगी गा मन के मन ला लूटत हवे गा-
अणि बनी के सपना दिखाके करत हवे मनमानी गा-
जनता हवन भोला भला सरकार हवे खिलाड़ी गा-
मन के मन मा एक जुटता नही है...

Posted on: Apr 17, 2018. Tags: KANAHIYALAL PADIHARI

नेता घर-घर जाता, पैर पकड़कर मांगता...व्यंग्य रचना

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक व्यंग्य रचना सुना रहे हैं :
नेता घर-घर जाता पैर पकड़कर मांगता-
किसी को कुछ नहीं देता अपने ही घर भरने के फिराक में रहता-
पांच साल में एक बार आता, सांथ में 100-50 शहर घुमाता-
मीठी-मीठी बाते करता अपना झोली भरके ले जाता-
फिर दर्शन नही देता छुप-छुप कर रहता-
कभी सामने नही आता अपना मुह घुमा लेता...

Posted on: Mar 11, 2018. Tags: KANAHIYALAL PADIHARI

आप पार्टी मा आओगा संगी आमा ला हम खाबो...कविता

ग्राम-तमनार, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी एक कविता सुना रहे हैं :
आप पार्टी में आओगा संगी आमा ला हम खाबो-
आमा ला खा के संगी देश ला बचाबो-
दुनिया ला बसाबो गा संगी दुनिया ला बसाबो-
दुनिया ला बसका के संगी भ्रष्टाचारी ला मार भगबो-
भ्रष्टाचारी ला भगाके संगी दुनिया ला बचाबो-
दुनिया ला बचा के संगी नवा दुनिया आनबो-
नवा दुनिया ला आन के संगी महगाई ला भगाबो...

Posted on: Mar 06, 2018. Tags: KANAHIYALAL PADIHARI

नया साल की खुशी में लोगो में है उमंग...कविता -

तमनार, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडिहारी नववर्ष पर एक कविता सुना रहे हैं :
नया साल की खुशी में लोगो में है उमंग – कुछ भी नया नही होता फिर भी मचाते है दंगल – वही सोम वही मंगल फिर भी उत्साह लिए – सभी के दिल दिमाग में जोर शोर से मचा है खलबल – 17 से 18 हुवा केवल बदला वर्ष का सन – जन मन में उथल पुथल उमंग से भर उठा वतन...

Posted on: Jan 01, 2018. Tags: KANAHIYALAL PADIHARI

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download