मै दिव्यांग हूँ, मेरा नाम राशनकार्ड से निरस्त कर दिया गया है| आवेदन करने पर कोई सुनवाई नहीं होती...म

जिला-जबलपुर (मध्यप्रदेश) से सतीश बता रहे हैं| वे भेड़ाघाट वार्ड क्रमांक 2 में रहते हैं, दिव्यांग हैं| उनका नाम राशन कार्ड से निरस्त करा दिया गया है| जब वे अपना नाम राशन कार्ड में जुडवाने के लिये अधिकारी के पास आवेदन करते हैं तो उनको ये बोल कर टाल दिया जाता है कि तुम छात्रावास में रहते हो इसलिए नाम नहीं जोड़ा जाएगा | उनका कहना है कार्यालय में आवेदन स्वीकार किया जाता है लेकिन उस पर कार्य नहीं होता| इसलिए वे सीजीनेट के साथियो से अपील कर रहे हैं कि दिए गये नंबर पर संपर्क कर नाम जुडवाने में मदद करें : संपर्क नंबर@7067396350.

Posted on: Mar 22, 2019. Tags: JABALPUR MP PROBLEM RASHAN CARD SATISH

चले आओ, चले आओ, चले आओ...ग़जल-

जबलपुर (मध्यप्रदेश) से शकील एक गज़ल सुना रहे हैं:
चले आओ, चले आओ, चले आओ-
कोई वादा नहीं फिर भी निगाहें राह तकती है-
तुम्हारा वो हँसी चेहरा ये कैसे भूल सकती है-
तुम्हारी एक झलक देखी मगर बेताब हैं ऐसे-
बड़ी प्यारी हमारी चीज कोई खो गई जैसे-
चले आओ, चले आओ, चले आओ...

Posted on: Mar 18, 2019. Tags: JABALPUR MP SHAKIL SONG

ये दुनिया भी अजीब है यारो, कुछ अच्छे तो कुछ खराब से मिलते है...पंक्तियाँ-

जबलपुर (मध्यप्रदेश) से सतीस पंक्तिया सुना रहे हैं :
जिंदगी की वो तक़दीर बदल गये-
ऐ जाने वाले मेरी खता तो बता दे क्या थी-
तक़दीर तो मुद्दतो से बदलती है-
ऐ जाने वाले ये बता दे मेरी खता क्या थी-
ये दुनिया भी अजीब है यारो, कुछ अच्छे तो कुछ खराब से मिलते है...

Posted on: Mar 18, 2019. Tags: JABALPUR MP SATISH

जिंदगी की इल्तजा दूर चमक बनकर रह गई...पंक्ति-

जबलपुर (मध्यप्रदेश) से प्रदीप एक पंक्ति सुना रहे हैं :
जिंदगी की इल्तजा दूर चमक बनकर रह गई-
फूल तो सभी मुरझा गये-
जिंदगी उनकी मृत बनकर रह गई-
जिंदगी की इल्तजा दूर चमक बनकर रह गई...

Posted on: Mar 16, 2019. Tags: JABALPUR MP PARDIP

वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो इसको बुलाता रहा...गजल

ग्राम-भेड़ाघाट, जिला-जबलपुर (मध्यप्रदेश) से सतीष कुमार एक गज़ल गीत सुना रहे है :
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो इसको बुलाता रहा-
चार पैसे कमाने मै आया शहर, गाँव मेरा मुझे याद आता रहा-
एक दिन में बनूँगा बड़ा आदमी, ये तस्बुर मुझे गुनगुनाता रहा-
पाठशाला से मै जब लौटता घर, अपने हाथों से रोटी खिलाती थी माँ-
वक्त का ये परिंदा रुका है कहाँ, मै था पागल जो उसको बुलाता रहा-
चार पैसे कमाने मै आया शहर, गाँव मेरा मुझे याद आता रहा...

Posted on: Feb 26, 2019. Tags: SATISH JABALPUR

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