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धान बटाइल दौलत बटाइल खेत और खलिहान हो...भोजपुरी लोकगीत

जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से अमीर हम्जा एक भोजपुरी लोकगीत सुना रहे हैं:
धान बटाइल दौलत बटाइल खेत और खलिहान हो-
बापू के भी बाट देलक कलयुग के संतान हो-
मानव धीरे-धीरे अब तो दानव बनल जाता हो-
राम के देश में लुगवा काहे रावण बनल जाता हो-
मानव धीरे-धीरे अब तो दानव बनल...

Posted on: Oct 03, 2016. Tags: AMIR HAMZA

तेरी नजाकत मेरी शराफत से भारी लगती है: ग़ज़ल

ग़ज़ल सुना रहें हैं अमिर हमजा मुजफ्फरपुर बिहार से :
तेरी नजाकत मेरी शराफत से भारी लगती है – ऐ हसीं तेरी हंसी भी प्यारी लगती है-
तेरा बदन संगमरमर से तराशा लगता है-
तुम मुद्दतो बाद भी हमारी लगती है-
तेरी आँखों में आज भी शर्मो हया बाकी है-
तेरी ख़ामोशी आज भी न जाने क्यों लाचारी लगती है-
तुझे लोग बेवफा कहते है,मुझे रंज होता है-
तेरी हर बेवफाई मुझे वफादारी लगती है-
“हमज़ा”को ज़ाम-ए-मोहब्बत पिलाई थी तुमने-
बन ना जाये मय कहीं ज़िन्दगी हमारी लगती है...

Posted on: Sep 20, 2016. Tags: Amir Hamza

पाक के इरादा नापाक हो गइल : भोजपुरी कविता

अमिर हमजा मुजफ्फरपुर बिहार से भोजपुरी मे देशभक्ति कविता सुना रहे है :
पाक तोहार नापाक इरादा कबो कामयाब ना हो पाई-
कतनो तू भेजब आतंकवादी सब के सब मारल जाई-
ई देश ह हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के-
ई देश ना ह तोहरा जइसन कसाई के-
हर शहीदन के कसम हम खा के कहिले-
अभी कइले बानी दोस्ती एहि से सहिले-
बिगड़ी मिज़ाज जहिया हम तोहके बता देहब-
बनके कहर टुटब तोहर हस्ती मिटा देहब-
एक एक खून के कतरा के कीमत चुकावे पड़ी-
ए पाक तोहके हिन्द के आगे आपन सिर झुकावे पड़ी – गर बा तोहरा में हिम्मत त फूँक बिगुल लड़ाई के-
क्षण भर में मिटा देहब तोहरा संगे तोहरा परछाई के-
दोस्ती के आड़ में कर मत गद्दारी-
हमहूँ निभवले बानी त तुहु निभाव यारी-
जय हिन्द जय भारत...

Posted on: Sep 18, 2016. Tags: Amir Hamza

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