120 वर्ष जीने वाला 60-70 वर्ष में ही जग छोड़कर चला जा रहा है, इससे दुर्भाग्य और क्या है...गद्द्यांश

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक गद्यांश (दुर्भाग्य और क्या है) सुना रहा है:
आज गाँवों को शहर में तब्दील होते देख रहा हूँ-
गाँव के मुखिया को गुथियारी करते देख रहा हूँ-
मंदिर को मदिरालय में तब्दील होते देख रहा हूँ-
हंसने खेलने के दिन में बच्चों को बोझ तले दबते देख रहा हूँ-
नदी नालों को दुखित होते देख रहा हूँ-
वन उपवन को कटते हुए देख रहा हूँ-
जिधर देखो भीड़ ही भीड़ शोरगुल का आलम भगदड़ मचा है-
चारो तरफ मौत का पहरा है-
बे स्वास्थय जलवायु से विभिन्न्य प्रकार के रोग प्रविष्ट जूझ रहा है-
रोक थाम का नाम नही बल्कि और तेजी से फैलाया जा रहा है-
जिसका परिणाम हर व्यक्ति को झेलना पड़ रहा है-
लाभ एक को होता है लेकिन भुगतना सभी को पड़ता है-
नई-नई खोज, नया-नया आविष्कार सुख-सम्रद्धि तो है-
पर इसका दुष्परिणाम भी भयानक है-
120 वर्ष जीने वाला 60-70 वर्ष में ही जग छोड़कर चला जा रहा है-
इससे दुर्भाग्य और क्या है-

Posted on: Mar 14, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

बूढी माँ सिसक रही थी, बहू उसे झिड़क रही थी...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
बूढी माँ सिसक रही थी, बहू उसे झिड़क रही थी-
पांच साल की पोती पुतली बना रही थी-
औरत का भी दीवाना बेटा राग जमा रहा था-
अंधी तू मरती क्यों नहीं, हरदम हमें सताती रहती है-
हरदम हम लोगों का चुगल करती रहती है-
पड़ोसियों को भी अपना आंसू बहाती रहती है...

Posted on: Mar 12, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

ऐ सरहद पे मरने वालों, तुमको कोटि-कोटि प्रणाम मेरा...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
ऐ सरहद पे मरने वालों-
तुमको कोटि-कोटि प्रणाम मेरा-
जिस माँ ने तुमको जन्म दिया-
उस माँ को भी नमन मेरा-
तुमने हंसते-हंसते कुर्बान हुवे-
देश वासियों को यही पैगाम दिये...

Posted on: Mar 12, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

आया फागुन झूम के, संग बसंत बहार लाया चुन के...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
आया फागुन झूम के-
संग बसंत बहार लाया चुन के-
बाग बगिया में पतझड़ आया-
आम महुआ चार के, तेंदू के पेड़ बौराया-
परसा सेमर लाल लाल, भौरा घूम रहा डाल-डाल-
तितली भी चहक रही डाली-डाली...

Posted on: Mar 12, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

कलम बदल डालो जिसमे जीत न हो...कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
कलम बदल डालो जिसमे जीत न हो-
पाठ्य बदल डालो जिसमे सामन्य सीट न हो-
न्याय मूर्ति बदल डालो जिसमे सच्चा न्याय न हो-
कानून बदल डालो जहां न्याय के सांथ अन्याय हो-
मुकद्दर तुम्हारे हांथ में है-
मुकदमा हरगिज नहीं, किस्मत तुम्हारे सांथ है...

Posted on: Mar 12, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER

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