120 वर्ष जीने वाला 60-70 वर्ष में ही जग छोड़कर चला जा रहा है, इससे दुर्भाग्य और क्या है...गद्द्यांश
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक गद्यांश (दुर्भाग्य और क्या है) सुना रहा है:
आज गाँवों को शहर में तब्दील होते देख रहा हूँ-
गाँव के मुखिया को गुथियारी करते देख रहा हूँ-
मंदिर को मदिरालय में तब्दील होते देख रहा हूँ-
हंसने खेलने के दिन में बच्चों को बोझ तले दबते देख रहा हूँ-
नदी नालों को दुखित होते देख रहा हूँ-
वन उपवन को कटते हुए देख रहा हूँ-
जिधर देखो भीड़ ही भीड़ शोरगुल का आलम भगदड़ मचा है-
चारो तरफ मौत का पहरा है-
बे स्वास्थय जलवायु से विभिन्न्य प्रकार के रोग प्रविष्ट जूझ रहा है-
रोक थाम का नाम नही बल्कि और तेजी से फैलाया जा रहा है-
जिसका परिणाम हर व्यक्ति को झेलना पड़ रहा है-
लाभ एक को होता है लेकिन भुगतना सभी को पड़ता है-
नई-नई खोज, नया-नया आविष्कार सुख-सम्रद्धि तो है-
पर इसका दुष्परिणाम भी भयानक है-
120 वर्ष जीने वाला 60-70 वर्ष में ही जग छोड़कर चला जा रहा है-
इससे दुर्भाग्य और क्या है-
