बूढी माँ सिसक रही थी, बहू उसे झिड़क रही थी...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
बूढी माँ सिसक रही थी, बहू उसे झिड़क रही थी-
पांच साल की पोती पुतली बना रही थी-
औरत का भी दीवाना बेटा राग जमा रहा था-
अंधी तू मरती क्यों नहीं, हरदम हमें सताती रहती है-
हरदम हम लोगों का चुगल करती रहती है-
पड़ोसियों को भी अपना आंसू बहाती रहती है...
