कुहू-कुहू कर मीठे स्वर में हमें बुलाती कोयल रानी...कोयल गीत
ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ पी एस पुष्प एक बाल गीत सुना रहे है:
कुहू-कुहू कर मीठे स्वर में-
हमें बुलाती कोयल रानी-
अमराई में ताल सुरीली-
उसकी लगती बड़ी सुहानी-
फूलो की सोंधी खुशबू में-
चहु दिशा में महकाती है-
रंग, बिरंगे तितली के संग-
फुदक, फुदक कर वह गाती है-
बगिया के सारे पंछी के-
मन को सच मुच हर लेती है-
ऋतुराज के इस मौसम में-
ढेरो खुशिया भर देती है...
Posted on: Mar 02, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER
जब नारी जग में न होगी तो जग में कैसे आओगी...नारी पर कविता
ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से बाल साहित्यकार डॉ पुष्प एक कविता सुना रहे है:
जब नारी जग में न होगी तो जग में कैसे आओगी-
जब घर आंगन में माँ नहीं तो प्रेम प्रीत कहाँ पाओगी-
जब न होंगे दादी नानी तो कौन कहानी सुनायेंगे-
जब स्वप्न सुन्दरी हो नहीं तो किससे ब्याह रचाओगे-
जब घर में बेटी न हो तो तुम किस पर लाड लुटाओगी-
जब तेरे घर में बहू नहीं तो कैसे वंश बढाओगी-
नारी बिन बह जग है सूना बात कब समझ पाओगे-
जब नारी जग में न होगी तो जग में कैसे आओगी...
Posted on: Mar 01, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER
भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन और स्वच्छता की कहानी-
डॉ जाकिर हुसैन स्वच्छता के ऊपर विशेष ख्याल रखते थे जरा सी गंदगी देखकर उनका मन खट्टा हो जाता था बात उस समय की है जब वो अध्यापक थे उन्होंने देखा कुछ छात्र गंदे और बिना पोलिश किये जूते पहनकर विद्यालय आते थे इससे उन्होंने आदेश दिया कि सभी छात्र पोलिश किये हुए जूते पहनकर ही विद्यालय आये पर उन्होंने दो तीन दिन के बाद उन्होंने गौर किया अधिकांश छात्रो ने उनकी घोषणा पर ध्यान नहीं दिया पहले जैसे ही जूते पहनकर विद्यालय आ रहे थे. छात्रो को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने के लिए डॉ जाकिर हुसैन ने जो कुछ किया और ये दूसरा कोई न करता, वे स्कूल के गेट पर जूते पालिश का सामान लेकर बैठ गए और जिस छात्र का भी जूता गंदा था उसे उतवाकर उसकी पालिश करने लगे. डा पी एस पुष्प@9754793710
Posted on: Mar 01, 2017. Tags: PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER
बसंत में सुषमा, श्रंगार, सुमन, सौरभ से सुरभित हो उठते हैं...बसंत पर कविता
बाल साहित्यकार डा पी एस पुष्प तमनार, जिला रायगड़ छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
बसंत में सुषमा, श्रंगार, सुमन,सौरभ से सुरभित हो उठते है-
कभी धनवान बुढे,जवान, सभी अलमस्त झूम हो उठते है – इस अल्हर से मौसम में गेहू भी हरिआये है-
वन,उपवन की सुन्दर काया,मन सबके अब भाए है-
बसंत राज की अगवानी में,कमल,कामिनी बिहस पड़ते है-
कभी धनवान बूढ़े,जवान, सभी अलमस्त झूम हो उठते है – खेत,खलियान मैदान अब,मस्ती में सब झूम रहे है-
प्यारे,प्यारे पुष्प निराले,सोलह श्रंगार धरती कर रहे है-
बसंत,बयार के गुंजन में,मदहोश सा पुरवाई भी लगती है-
कभी धनवान बूढ़े,जवान, सभी अलमस्त झूम हो उठते है – बसंत में सुषमा,श्रंगार,सुमन,सौरभ से सुरभित हो उठते है...
Posted on: Feb 25, 2017. Tags: PS PUSHP
जनपथ में दीप जलाकर आओ प्रकाश फैलायें...कविता
ग्राम-तमनार पड़ेगाँव, जिला-रायगढ़ (छतीसगढ़) से कवि डॉ पी एस पुष्प एक बाल कविता सुना रहे है:
जनपथ में दीप जलाकर आओ प्रकाश फैलायें-
आ रही हैं दुलारी कामधेनु आओ आरती सजाये-
माता है कामधेनु हमारी रक्षा उसकी नित करना है-
उसके प्रति जो हो रही अनाचार उसको जड़ से नष्ट करना है-
मिलकर आज संकल्प करके हम मशाल संघर्ष के उठाये-
आ रही हैं दुलारी कामधेनु आओ आरती सजाये...
