जिंदगी के सफर में...नववर्ष के उपलक्ष्य में एक कविता
बावरा मन कहता है-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूं-
न कोई हिसाब हो-
न हो कोई व्यापार-
जिन्दगी के सफर में-
यूँ ही सपने सजाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
न पथ की चिंता हो-
न हो पथिक का इन्तजार-
इंसानियत की राह पे-
यूँ ही हमसफ़र बनाता रहूँ-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
शर्म -लाज का मोह न हो-
न हो सवाल जवाब-
खुशियों की इस बगिया में- यूँ ही प्रेम रस फैलाता रहूँ – बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ- न खुछ खोने का डर हो-
न हो पाने का लालच-
जीवन रुपी इस नैया को-
यूँ ही हंस हंस के पार लगाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ..
सभी साथियों को नव वर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाये |
के एम् भाई
8756011826
Posted on: Jan 03, 2017. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
क्रिसमस आया क्रिसमस आया घर-घर में खुशियाँ लाया...क्रिसमस पर कविता
कानपुर (उत्तरप्रदेश) से के एम भाई क्रिसमस के अवसर पर एक कविता सुना रहे हैं :
क्रिसमस आया क्रिसमस आया – घर-घर में खुशियाँ लाया-
मीठे मीठे पकवान और-
रंग बिरंगे तारे लाया-
क्रिसमस आया क्रिसमस आया-
गुब्बारे संग तितलियाँ लाया-
गीत-संगीत संग ढोल-नगाड़े लाया-
क्रिसमस आया क्रिसमस आया-
घर घर में खुशियाँ लाया-
रौशनी संग खूब सारा प्यार लाया-
नए नए खेल-खिलौने और उपहार लाया-
क्रिसमस आया क्रिसमस आया-
घर घर में खुशियाँ लाया-
बच्चों ने खूब धूम-धडाका मचाया-
बड़ों ने भी गीत गुनगुनाया-
क्रिसमस आया क्रिसमस आया-
घर घर में खुशियाँ लाया...
Posted on: Dec 25, 2016. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
इंसान ही इंसान का रक्त बहाता है...कविता
जिला-कानपुर उत्तरप्रदेश से के एम भाई 26/11 के शहीदों पर एक कविता सुना रहे है:
इंसान ही इंसान पे रक्त बहाता है-
पलक झपकते ही एक बुरा ख्वाब आता है-
और यू ही मन को रुला जाता है-
आसुओ का बाहों अपने आप ही निकल आता है-
जब भी वो मंजर याद आता है-
शहीदों की याद में शहीदों की में-
ये दिल यू ही गुनगुनाता है-
क्यों इंसान ही इंसान पे रक्त बहाता है...
Posted on: Nov 29, 2016. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER
वोट और नोट के खेल में...कविता
वो मजहबी रंग की बात करते है-
पर इंसानी मजहब की बात नहीं करते-
वो निवेश और विनिमेश की बात करते है-
पर लोकतंत्र की बात नहीं करते-
वो लहू के रंग की बात करते है-
पर संबंधो की बात नहीं करते-
वो नफरत और टकराव की बात करते है-
पर एकता और विश्वास की बात नहीं करते-
वो इंसानी जात की बात करते है-
पर इंसानियत की बात नहीं करते-
वो आंसू बहाने की बात करते है-
पर ख़ुशी बांटने की बात नहीं करते-
वो टकराव और उन्माद की बात करते है-
पर हाथ जोड़ने की बात नहीं करते-
वो राज और राजनीति की बात करते है-
पर सबके विकास की बात नहीं करते-
वो वोट और नोट में खेल की बात करते हैं-
पर इंसानी हक़ की बात नहीं करते-
वो सियासी दांव पेच की बात करते है-
पर इंसानी विशवास की बात नहीं करते-
इंसानी विशवास की बात नहीं करते...
Posted on: Nov 24, 2016. Tags: KM BHAI
शब्द ही हंसाते हैं, शब्द ही रुलाते हैं...कविता
के.एम.भाई कानपुर, उत्तरप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है शब्द:
शब्द ही हंसाते हैं,शब्द ही रुलाते हैं-
शब्दों से ही ख़ुशी शब्द से ही दुःख-
हर एक मुस्कुराहट के पीछे शब्द ही है-
और शब्दों के कारण आंसू-
शब्द ही सजाते हैं,शब्द ही बिगाड़ते हैं-
शब्दों ने रची ये दुनिया-
शब्दों से हुआ कोई मालामाल-
शब्दों ने किया कंगाल-
मैं और तुम के बीच भी शब्द ही है-
और आप हम में भी एक शब्द है-
हर एक स्त्री का होता है एक शब्द-
और हर पुरुष का एक शब्द-
कोई जीता है शब्दों के लिए-
तो कोई मरा शब्द से-
मेरी जीत में एक शब्द है-
और तेरी हार भी एक शब्द है-
अच्छा भी है शब्द,बुरा भी होता है शब्द-
फिर भी ना जाने क्यों-
शब्दों से ही प्यार होता है...
