शब्द ही हंसाते हैं, शब्द ही रुलाते हैं...कविता
के.एम.भाई कानपुर, उत्तरप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है शब्द:
शब्द ही हंसाते हैं,शब्द ही रुलाते हैं-
शब्दों से ही ख़ुशी शब्द से ही दुःख-
हर एक मुस्कुराहट के पीछे शब्द ही है-
और शब्दों के कारण आंसू-
शब्द ही सजाते हैं,शब्द ही बिगाड़ते हैं-
शब्दों ने रची ये दुनिया-
शब्दों से हुआ कोई मालामाल-
शब्दों ने किया कंगाल-
मैं और तुम के बीच भी शब्द ही है-
और आप हम में भी एक शब्द है-
हर एक स्त्री का होता है एक शब्द-
और हर पुरुष का एक शब्द-
कोई जीता है शब्दों के लिए-
तो कोई मरा शब्द से-
मेरी जीत में एक शब्द है-
और तेरी हार भी एक शब्द है-
अच्छा भी है शब्द,बुरा भी होता है शब्द-
फिर भी ना जाने क्यों-
शब्दों से ही प्यार होता है...
