जिंदगी के सफर में...नववर्ष के उपलक्ष्य में एक कविता
बावरा मन कहता है-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूं-
न कोई हिसाब हो-
न हो कोई व्यापार-
जिन्दगी के सफर में-
यूँ ही सपने सजाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
न पथ की चिंता हो-
न हो पथिक का इन्तजार-
इंसानियत की राह पे-
यूँ ही हमसफ़र बनाता रहूँ-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
शर्म -लाज का मोह न हो-
न हो सवाल जवाब-
खुशियों की इस बगिया में- यूँ ही प्रेम रस फैलाता रहूँ – बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ- न खुछ खोने का डर हो-
न हो पाने का लालच-
जीवन रुपी इस नैया को-
यूँ ही हंस हंस के पार लगाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ-
बन भौरा मै यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहूँ..
सभी साथियों को नव वर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाये |
के एम् भाई
8756011826
