युग की जड़ता के खिलाफ एक इन्कलाब है...सांस्कृतिक जागरूकता गीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक सांस्कृतिक जागरूकता गीत सुना रहे हैं:
युग की जड़ता के खिलाफ एक इन्कलाब है-
हिन्द के जवानों का एक सुनहरा ख्वाब है-
भारतीय सांस्कृतिक क्रांति, भारतीय सांस्कृतिक क्रांति-
व्योम में हमारी पहुँच बढ़ रही आज-
पर दूर हो रहा है घर पड़ोसी का-
आदमी को आदमी के करीब लाएगी-
भारतीय सांस्कृतिक क्रांति-
आदमी भविष्य में यंत्र का न हो गुलाम-
मानवीय गुण बढ़ेंगे काम से-
ऐसे योग युक्ति काम हर जगह चलाएगी-
भारतीय सांस्कृतिक क्रांति, भारतीय सांस्कृतिक क्रांति...
Posted on: Feb 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
हमको अपने भारत की मिट्टी से अनुपम प्यार है....देशभक्ति गीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं:
हमको अपने भारत की मिट्टी से अनुपम प्यार है-
अपना तन-मन-जीवन सब इस मिट्टी का उपहार है-
इस मिट्टी में जन्म लिया था दशरथ नंदन राम ने-
इस धरती पर गीता गाई यदुकुलभूषन श्याम ने-
इस धरती के आगे मस्तक झुकता बारम्बार है-
हमको अपने भारत की मिट्टी से अनुपम प्यार है-
इस मिट्टी की जौहर गाथा गाई राजस्थान ने-
इसे बनाया पावन गांधी के महान बलिदान ने-
मीरा के गीतों की इसमें छिपी हुई झंकार है-
हमको अपने भारत की मिट्टी से अनुपम प्यार है....
Posted on: Feb 18, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बतिया कही हम सुना हमार बाबू-माई....भोजपुरी शिक्षा जागरूकता गीत
मालिघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक भोजपुरी गीत प्रस्तुत कर रहे हैं:
बतिया कही हम सुना हमार बाबू-माई-
गउआं में आपन स्कूल खोलवाई-
दूर ना हमसे जा ला समइया अनमोल गवा ला-
हो गउआं-जवरवा में खोलवाई दी स्कूल खेले वाला-
खेलब-कूदब-पढ़ब-लिखब जग उजियार हम करब-
घर के काम में हाथ बटाइब दुनियादारी के सीखब-
आपन भाषा में आपन बोली में लिखब सबके कहानी-
हो गउआं-जवरवा में खोलवाई दी स्कूल खेले वाला...
Posted on: Feb 12, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चले चदरिया ओढ़ बसंती हम बलिदानी वीर की....देशभक्ति गीत
मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार एक देशभक्ति गीत गा रहे हैं:
हमने पाई थाह आज माँ तेरे मन के पीर की-
चले चदरिया ओढ़ बसंती हम बलिदानी वीर की-
यही बसंती चादर ओढ़ी नानक ने रैदास ने-
उंच नीच का भेद मिटाया था श्रद्धा-विश्वास ने-
सिया राम में सारे जग को जाना तुलसीदास ने-
मुझको कहाँ ढूंढत बन्दे मैं तो तेरे पास में-
गूँज उठी थी इसी वेश वाणी संत कबीर की-
चले चदरिया ओढ़ बसंती हम बलिदानी वीर की-
पहना था यह वेश बसंती जब रणवीर प्रताप ने-
छुड़ा दिए छक्के दुश्मन के खींचे तक की टॉप ने-
इसी वेश में निकले बिस्मिल-भगत सिंह-आजाद थे-
किए न्योछावर प्राण न लेकिन मुख पर दुःख-अवसाद थे-
कड़ी बनेंगे हम भी बलिदानों की उस जंजीर की-
चले चदरिया ओढ़ बसंती हम बलिदानी वीर की.....
Posted on: Feb 10, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
गउआं-जवरवा के तू छोट भइया...भोजपुरी बटोहिया गीत
मुजफ्फरपुर, बिहार से सुनील कुमार भोजपुरी में एक बटोहिया गीत सुना रहे हैं, गीत में भाई परदेश जा रहा है और बहन उससे कुछ अपील कर रही है :
गउआं-जवरवा के तू छोट भइया-
तोहरो प नाज घर-परिवार हो-
जाई छा विदेशवा कमाए तू भइया-
छोड़िहा ना अंगना-दुआर हो-
कातिक में छठी मइया आवेला दुअरवा-
दे ला गांव के आशीष हो-
सामा-चकवा भाई-बहिन के परबवा-
भूल ना जइहा राखी के त्यौहार-
सुनि ला कि देशवा में आइल बा तकनीकवा-
मिस कॉल से सुनि ला सारा दुनिया-
फुर्सत मिले पर भेजिहा संदेसवा-
रोजगार के साथे-साथे सीखिहा नया तकनीकवा....
