सोचि-सोचि जिया हमरो काहे घबराता...भोजपुरी लोकगीत

जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से रिया भोजपुरी भाषा में एक लोकगीत प्रस्तुत कर रही हैं:
सोचि-सोचि जिया हमरो काहे घबराता-
दरोगा जी हो चार दिन से पियवा बा लापता-
शहर में खोजली बजरिया-बजरिया-
कतहूं बलम जी ना आवेलें नजरिया-
केतनों लगावातानी लगत नइखे पता-
दरोगा जी हो चार दिन से पियवा बा लापता...

Posted on: Nov 10, 2016. Tags: RIYA MUZAFFARPUR

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम...प्रेरणा गीत

सुप्रिया, रागिनी, खुशी,खुशबू, सारिका, आँचल मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर बिहार से एक गीत सुना रही हैं:
ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम-
नेकी पर चले और वदी से टले-
ताकि हंसते हुए निकले दम-
बड़ा कमजोर हैं आदमी-
अभी  लाखों हैं इसमें कमी-
पर तू जो खड़ा हैं दयालु बड़ा-
तेरी कृपा से धरती थमी-
हैं तेरी रौशनी में जो दम-
तू अमावश को कर दे
पूनम नेकी पर चले...
ये अंधेरा घना छा रहा-
तेरा इंसान घबरा रहा-
हो रहा बेखबर ,कुछ न आता नजर-
सुख का सूरज छिपा जा रहा है तेरी रौशनी....
जब जुल्मों का हो सामना-
तब तू ही हमे थामना-
वो बुराई करे हम भलाई करें-
नहीं बदले की हो कामना-
बढ़ उठे प्यार का ये भरम-
और मिटे बैर का ये भरम...

Posted on: Sep 22, 2016. Tags: SUPRIYA MUZAFFARPUR

Recording a report on CGNet Swara

Search Reports »

Loading

Supported By »


Environics Trust
Gates Foundation
Hivos
International Center for Journalists
IPS Media Foundation
MacArthur Foundation
Sitara
UN Democracy Fund


Android App »


Click to Download