बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ, कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले...बाल कविता

ग्राम-त्रिकुंदा से मंगेश यादव एक बाल कविता सुना रहे है-
बचना नीचे से कोयल निकरी गोठ-
कावा पाले उसके अंडे वह मस्ती में डोले-
मानव राम-राम अंधे चादर-
पानी है धूनी रे माई सीष बिचारी-
मछली बगुले मोर उड़ाई-
गिर गिट रंग बदले अपना देह-
फूल के पास झट पकडे उन्हें...

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: MANGESH YADAV

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