मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली...भ्रूण हत्या पर कविता

ग्राम-सिवनी, विकासखण्ड-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता शर्मा भ्रूण हत्या के बारे में एक कविता सुना रहे है:
मै जन्म ले सकूं, मुझे साँस तो मिले-
ममता से तेरा मुख, एक बार तो खिले, तू भी तो देख मै हूँ, किस रूप में ढली-
माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली, ऐसा ही किया होता, जो माता तुम्हारी-
होती कहा बतावो अस्तित्व हमारी, तू भी तो आख़िर, माँ के आंचल तले पली-
सोचो कि क्या तेरी आत्मा धिक्कारती नही, क्यों तूने लाई जीवन सवारती नही-
क्या तेरे अन्तरात्मा में ना हो ख़लबली, माँ मत मसल मैं ही तेरी, बगिया की एक कली...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए, मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए...कविता

ग्राम-सिवनी, ब्लॉक-मरवाही, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से कान्ता प्रसाद शर्मा एक कविता सुना रहे है:
है मेरा एक सोचना काश ऐसा हो जाए-
मेरा देश फ़िर ऐसा सोच जैसा हो जाए-
देवता सरीखे पिता माँता हो, स्नेही भ्राता हो-
मिलनसार नाता हो, पुत्र सा जमाता हो-
प्रदूषित ना अन्न हो, शोषित ना मन हो-
आत्मा प्रसन्न हो, सभी लोग धन्य हो-
अच्छा प्रशासक हो, बुराई का नाशक हो-
धर्म का उपाशक हो, सत्य सदा भाषक हो-
शिक्षा में शिष्टाचार हो, आदर सत्कार हो...

Posted on: Apr 07, 2018. Tags: KANTA SHRMA

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