गुरु बिना ज्ञान, गंगा बिना तिरत...सुहा गीत -

ग्राम-घोटिया, ब्लाक-भानुप्रतापपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से कौशलिया जैन, बसंती चिराम, कुंती एक सुहा गीत सुना रही है:
गुरु बिना ज्ञान गंगा बिना तिरत-
एकदशी बिन व्रत कहाँ है-
माता बिन गोद पिता बिन प्यारा-
बिना पति के सिंगार कहाँ है-
गुरु बिना ज्ञान गंगा बिना तिरत...

Posted on: Dec 03, 2017. Tags: KOUSHLIYA BASANTI KUNTI KANKER

इसी में जीना यारो इसी में मरना...देश भक्ति गीत -

ग्राम-चिन्नार, तहसील-गीदम, जिला-दन्तेवाड़ा, (छत्तीसगढ़) से गजमती साहनी, बसंती नाग और रामवती भवानी एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं:
इसी में जीना यारो इसी में मरना-
इसी में सब कुछ करना है-
हमको तुमको प्रभु ने बनाया-
प्रभु की महिमा हो-
नदी और झरनों को प्रभु ने बनाया-
आकाश और धरती को प्रभु ने बनाया...

Posted on: Nov 09, 2017. Tags: GAJMATI SAHANI BASANTI NAG RAMBATI DANTEWADA

मन करता है सूरज बनकर, आसमान में दौड़ लगाऊं...बालिका की कविता

ग्राम-समीज,ब्लॉक- आनंदपुर, जिला-पश्चिम सिंहभूम, झारखण्ड से बसंती दास एक कविता सुना रही हैं:
मन करता है सूरज बनकर, आसमान में दौड़ लगाऊं
मन करता है चंदा बनकर, सब तारों पर अकड़ दिखाऊं
मन करता है बाबा बनकर, घर में होश जमाऊं
मन करता हैं पापा बनकर, मैं भी अपनी मूंछ बढाऊं
मन करता हैं तितली बनकर, दूर-दूर उड़ता जाऊं
मन करता है कोयल बनकर, मीठे-मीठे बोल सुनाऊं
मन करता है चिड़िया बनकर, चीं-चीं-चीं शोर मचाऊं
मन करता है चरखी लेकर, पीला-लाल पतंग उडाऊं

Posted on: Feb 19, 2015. Tags: Basanti Das

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