मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित...कविता-

ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से ओमकार मरकाम एक कविता सुना रहे हैं :
मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित-
चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूँ-
माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मै अंकिचन-
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन-
थाल मै लाऊं सजाकर भाल जब-
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण...

Posted on: Jun 08, 2019. Tags: CG KABIRDHAM OMKAR MARKAM POEM

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