हिन्दी हैं हम और हिन्दुस्तान हमारा...हिन्दी दिवस पर एक कविता
हिन्दी हैं हम और हिन्दुस्तान हमारा
गरिमा हिन्दी की खुशहाल होगा जग सारा
मातृभाषा है हिन्दी विदेशी भाषा में पढाई
हिन्दी में होगी पढाई तब सब होंगे भाई भाई
हिन्दी राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ती है
विदेशी भाषा विकास के रास्ते को मोड़ती है
हिन्दी में करो पढाई तब सबको होगा हितकारी
सही मायने में हिन्दी भाषा है गुणकारी
गीत संगीत हिन्दी की दिल को छु जाती है
विदेशी भाषी गीत ऊपर से निकल जाती है
मात्रिभूमि की रक्षा के लिए हिन्दी को अपनाना होगा
सारे जहां पर हिन्दी का गुणगान करना होगा
हिन्दी में है बिंदी, बिंदी का है बड़ा कमाल
बिंदी की जिसने इज्ज़त की, वही होता है मालामाल
धर्मग्रंथों के रचयिता हिन्दी का मान बढाए हैं
धर्म मान इज्जत की भाषा देश में जगाए हैं
सब मिल जुल कर हिन्दी को जब अपनाएंगे
तभी उन्नति के रास्ते पर कुछ कदम आगे चल पाएंगे
पतिराम ताराम
Posted on: Sep 14, 2012. Tags: Patiram Taram
ए भ्रष्टाचार सारे देश में बड़ा है तेरा चमत्कार...एक कविता
ए भ्रष्टाचार सारे देश में बडी है तेरा है चमत्कार
सारे देशवासी नित दिन तुझे करते हैं नमस्कार
कलयुग में सर्वत्र है तेरा राज
आपके बिना दफ्तरों में नहीं होता है कामकाज
कार्यालय में आवेदन देख बाबू अधिकारी मंद मंद मुस्कुराते हैं
घूस के चक्कर में महीनों घुमाते हैं
देश भर में भ्रष्टाचार कण कण में है विराजमान
जिसने इमानदारी दिखाई उसको कर देते हैं बदनाम
बिना मेहनत के खाना हों गयी है हमारी संस्कृति
भ्रष्टाचार से समाज में आ गयी है विकृति
भ्रष्टाचार को भगाने सारे देशवासी एकतरफा भागे हैं
जिनको भ्रष्टाचार करने का मौक़ा नहीं मिला भ्रष्टाचार रोकने में सबसे आगे हैं
भ्रष्टाचारी सारे साधन अपनाकर भोग रहें हैं सुख
स्वतन्त्रता सेनानी ज़िंदा होते, उनके दिल में कितना होता दुःख
सारे देशवासी भ्रष्टाचार को अंतरात्मा से जिसदिन निकाल देंगे फेंक
तभी भ्रष्टाचार से मुक्त हों जाएगा हमारा देश
राष्ट्रीयता की भावना जिस दिन सारे देश भर में जाग जाएंगे
स्वतन्त्रता का आनंद सारे देशवासी भोग पाएंगे
क़ानून का शिकंजा अब धीरे धीरे कस रहें हैं
भ्रष्टाचारी अब धीरे धीरे फंस रहें हैं
अधिकारी नेता ठेकेदार को भ्रष्टाचार करना लग रहा था खेल
अन्ना हजारे के आंदोलन से अब जाने लगे हैं जेल
लोकपाल विधेयक से भ्रष्टाचारी हों रहे चिंतित
उन्नति देश करेगा निश्चित
पतिराम ताराम, सुकमा, छत्तीसगढ़
Posted on: Aug 22, 2012. Tags: Patiram Taram
आज़ाद भारत के कर्णधार बन गए जमाखोर पूंजीवादी ...एक कविता
गुलाम भारत माता की बेडियाँ तोडी देश के सपूत गांधीवादी
आज़ाद भारत के कर्णधार बन गए जमाखोर पूंजीवादी
देश के वीर भक्तों ने आज़ादी के लिए किए बलिदान
शहीद होकर वे कहलाए हमारे देश के महान
मुगलों अंग्रेजों ने सदियों से देश पर राज़ किए
गुलाम बनाकर अत्याचारियों ने पुरखों को परेशान किए
क़ानून देश में कितना लचीला, गरीब को दफा, सफा अमीर
अराजकता इतनी बढ़ गयी जनता कोस रही तकदीर
आज़ाद भारत में जनता देखी राजा बनने का सपना
धन बटोरने के चक्कर में न कोई पराया न अपना
राजनीतिज्ञों ने चुनाव जीतने जंगलों में दिला दिया पटटा
अकाल और गरमी से किसानों का बैठ गया भटठा
गलत वन नीति से पर्यावरण पर देश में असर हुआ है
रासायनिक खाद और कीटनाशक से बहुत बीमारी का घर हुआ है
भूजल जिस दिन रासायनिक खाद से दूषित हों जायेंगे
जीव-जंतु को बचाने देश भर में कोई नज़र नहीं आएँगे
विदेशी क़र्ज़ लेकर राजनीतिग्य देश को चला रहें हैं
अपने हाथों अपने घर को जलाने का तैयारी कर रहें हैं
जिस दिन विदेशी कर्जा सर से ऊपर हों जायेगी
निश्चित मानो देश दुबारा गुलाम हों जाएगी
काला धन लाने, भ्रष्टाचार भगाने देशवासी कर रहें लड़ाई
अंतरात्मा से पूछो भ्रष्टाचार है सब के दिल में समाई
विकास का रास्ता छोड़ काला धन भ्रष्टाचार पर लगा रहें ध्यान
देश जा रही विनाश की ओर कैसा होगा देश का कल्याण
धरना प्रदर्शनकारी कर रहे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान
आपसी लड़ाई छोडकर ध्वज का करना है हमें सम्मान
जिस दिन सारे देशवासी आपसी भाई चारे की भावना में बांध जाएंगे
उसी दिन से आज़ादी आ आनंद सारे देशवासी भोग पाएंगे
पतिराम ताराम
9425189007
