आज़ाद भारत के कर्णधार बन गए जमाखोर पूंजीवादी ...एक कविता
गुलाम भारत माता की बेडियाँ तोडी देश के सपूत गांधीवादी
आज़ाद भारत के कर्णधार बन गए जमाखोर पूंजीवादी
देश के वीर भक्तों ने आज़ादी के लिए किए बलिदान
शहीद होकर वे कहलाए हमारे देश के महान
मुगलों अंग्रेजों ने सदियों से देश पर राज़ किए
गुलाम बनाकर अत्याचारियों ने पुरखों को परेशान किए
क़ानून देश में कितना लचीला, गरीब को दफा, सफा अमीर
अराजकता इतनी बढ़ गयी जनता कोस रही तकदीर
आज़ाद भारत में जनता देखी राजा बनने का सपना
धन बटोरने के चक्कर में न कोई पराया न अपना
राजनीतिज्ञों ने चुनाव जीतने जंगलों में दिला दिया पटटा
अकाल और गरमी से किसानों का बैठ गया भटठा
गलत वन नीति से पर्यावरण पर देश में असर हुआ है
रासायनिक खाद और कीटनाशक से बहुत बीमारी का घर हुआ है
भूजल जिस दिन रासायनिक खाद से दूषित हों जायेंगे
जीव-जंतु को बचाने देश भर में कोई नज़र नहीं आएँगे
विदेशी क़र्ज़ लेकर राजनीतिग्य देश को चला रहें हैं
अपने हाथों अपने घर को जलाने का तैयारी कर रहें हैं
जिस दिन विदेशी कर्जा सर से ऊपर हों जायेगी
निश्चित मानो देश दुबारा गुलाम हों जाएगी
काला धन लाने, भ्रष्टाचार भगाने देशवासी कर रहें लड़ाई
अंतरात्मा से पूछो भ्रष्टाचार है सब के दिल में समाई
विकास का रास्ता छोड़ काला धन भ्रष्टाचार पर लगा रहें ध्यान
देश जा रही विनाश की ओर कैसा होगा देश का कल्याण
धरना प्रदर्शनकारी कर रहे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान
आपसी लड़ाई छोडकर ध्वज का करना है हमें सम्मान
जिस दिन सारे देशवासी आपसी भाई चारे की भावना में बांध जाएंगे
उसी दिन से आज़ादी आ आनंद सारे देशवासी भोग पाएंगे
पतिराम ताराम
9425189007
