शब्द ही हंसाते हैं, शब्द ही रुलाते हैं...कविता

के.एम.भाई कानपुर, उत्तरप्रदेश से एक कविता सुना रहे हैं जिसका शीर्षक है शब्द:
शब्द ही हंसाते हैं,शब्द ही रुलाते हैं-
शब्दों से ही ख़ुशी शब्द से ही दुःख-
हर एक मुस्कुराहट के पीछे शब्द ही है-
और शब्दों के कारण आंसू-
शब्द ही सजाते हैं,शब्द ही बिगाड़ते हैं-
शब्दों ने रची ये दुनिया-
शब्दों से हुआ कोई मालामाल-
शब्दों ने किया कंगाल-
मैं और तुम के बीच भी शब्द ही है-
और आप हम में भी एक शब्द है-
हर एक स्त्री का होता है एक शब्द-
और हर पुरुष का एक शब्द-
कोई जीता है शब्दों के लिए-
तो कोई मरा शब्द से-
मेरी जीत में एक शब्द है-
और तेरी हार भी एक शब्द है-
अच्छा भी है शब्द,बुरा भी होता है शब्द-
फिर भी ना जाने क्यों-
शब्दों से ही प्यार होता है...

Posted on: Nov 17, 2016. Tags: KM Bhai SONG VICTIMS REGISTER

मुस्कराता रहे जीवन, मुस्कराता रहे जीवन...कविता

जिला-कानपुर (उ.प्र.) से के एम भाई एक कविता सुना रहे हैं :
मुस्कराता रहे जीवन !!
तितली बनकर यूँ ही – उड़ता रहे जीवन-
फूलों सा यूँ ही-
महकता रहे जीवन-
हर एक मोड़ पर यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
पंक्षियों सा यूँ ही-
चहकता रहे जीवन-
तिनका तिनका बटोरकर यूँ ही-
दाना चुगता रहे जीवन-
हर घड़ी यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
हर आंगन पर यूँ ही-
सजता संवरता रहे जीवन-
डाल डाल पर यूँ ही-
खुशियाँ लुटाता रहे जीवन-
हर घड़ी, हर पल यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
दीप बनकर यूँ ही-
प्रेम के बीज बांटता रहे जीवन-
दिन रात यूँ ही-
मुस्कराता रहे जीवन-
मुस्कराता रहे जीवन...

Posted on: Oct 21, 2016. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

क्या आयेगा गाँधी दोबारा,क्या आयेगा गाँधी दोबारा...गाँधी जयंती पर कविता

जिला-कानपुर (उ.प्र.) से KM भाई गाँधी जयंती के उपलक्ष्य में एक कविता सुना रहे हैं:
क्या आयेगा गाँधी दोबारा,क्या आयेगा गाँधी दोबारा-
पूछती हैं गलियां पूछते हैं गाँव चोबारा-
पूछती हैं नदियाँ पूछती हैं लोकतंत्र हमारा-
क्या आयेगा गाँधी दोबारा-
पुकारती हैं पुकारती हैं निर्भया-
पुकारता हैं कालाहांडी का सबेरा-
क्या आयेगा गाँधी दोबारा...

Posted on: Oct 02, 2016. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

शहीद भगत सिंह की याद में...भगत सिंह जन्म दिवस पर कविता

जिला-कानपुर (उ.प्र.) से के एम भाई आज भगत सिंह के 109 वी जन्म दिवस के उपलक्ष्य में एक कविता सुना रहे हैं:
न आंसू हैं न है ख़ुशी-
न जश्न है न शोक-
हर लफ्ज़-
आज है खामोश-
इन्कलाब का-
वो चेहरा-
आज बन गया-
है एक कोष-
न रंग है न है जोश-
न फ़िक्र है न रोष-
वतन का-
वो मतवाला-
आज हो-
गया है बेहोश-
न तप है न तपिश-
न शौर्य है न कशिश-
आजाद –बिस्मिल का-
वो सरफ़रोश-
आज हो-
गया है एक पोज़-
न गुलामी है न है ब्रिटिश-
न रंज है न है सितम-
पंजाब का-
वो भगत-
आज बन गया है-
यादों का एक कोष-
यादों का एक कोष...

Posted on: Sep 28, 2016. Tags: KM BHAI SONG VICTIMS REGISTER

समाजवाद का खेल...कविता

कानपुर उत्तरप्रदेश से के एम भाई एक कविता सुना रहे हैं:
कभी चाचा फेल हैं तो-
कभी बऊआ फेल है-
नेताजी की क्लास में-
परिवारवाद का फेम है-
कोई गाय मांगे तो-
कोई भैंस का फैन है-
कुर्सी की लड़ाई में-
आज परिवार केंद्र है-
न विकास न सुधार-
यहाँ कोई तीसरा गेंद है-
सत्ता के मैदान में-
यह सब भईया-
समाजवाद का खेल है-
समाजवाद का खेल है...

Posted on: Sep 19, 2016. Tags: KM Bhai

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