उल्लू आया उल्लू आया,एक गुन का गोला लाया...कविता-
ग्राम नवलपुर, पोस्ट-कोतरी, जिला-मुगेली छत्तीसगढ़ से नेहा बुनकर के साथ संजना नेताम है, जो एक कविता सुना रही है:
उल्लू आया उल्लू आया,एक गुन का गोला लाया-
चरखा बोला चूं चूं, खरगोश बोला कुह कुह-
देखो रंग से भरी दवाद,है किसान भाई हल के साथ...
Posted on: Jul 10, 2020. Tags: MUNGELI CG NEHA BUNKAR POEM SANJNA NETAM SONG VICTIMS REGISTER
मन खेला जीवन जिए भर पेज पसिया काफी है...छत्तीसगढ़ी कविता-
ग्राम-दक्कोटोला, पोस्ट-चिल्हाटी, तहसील-अम्बागढ़ चौकी, जिला-राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ से जयसिंह मोरले एक कविता सुना रहे है, शीर्षक जीवन जिए भर काफी है:
मन खेला जीवन जिए भर पेज पसिया काफी है-
जन बुलाओ दाई दादा ला मया के अचरा काफी है-
मेहनत कस मन के भर तोरकुम भुइया काफी है-
मया गोट बतातुं संगी मरार भर एक हरिया काफी है-
किसम-किसम के उपजारे संगी साख भाजी चूर चुटिया काफी है-
मेहनत कस मन के भर तोरकुम भुइया काफी है...
Posted on: Jun 30, 2020. Tags: JAISINGH MORLE POEM RAJNANDGAON CG SONG VICTIMS REGISTER
छूट गया घर सोने का...कविता-
ग्राम-खुटैनी, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से प्रियंका मार्को एक गीत सुना रही हैं:
छूट गया घर सोने का-
सुना पहले थी ये विराना-
किसी रंग बिरंगे और उमंग भरे मै-
मेले के लौटने पर एक आदमी देखा-
थका हारा और बिलकुल अकेला...
Posted on: Jun 25, 2020. Tags: BALRAMPUR CG POEM PRIYANKA MARKO SONG VICTIMS REGISTER
कल तक संग्राम था पाकिस्तान से...कविता-
राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेन्द्र गंधर्व एक कविता सुना रहे हैं:
कल तक संग्राम था पाकिस्तान से-
आज संग्राम है चीन से-
जब सबको पता है-
मिट्टी में मिलने के लिये थोड़ी सी जगह चाहिये-
किसी का रिश्ता नहीं ढेर सी जमीन से-
आज संग्राम है चीन से-
एकता के फूल टूट गये, आज ह्रदय के दाग से... (AR)
Posted on: Jun 20, 2020. Tags: CG POEM RAJNANDGAON SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV
दिन का उजाला रात्रि का अंधकार है...कविता
ग्राम-नवलपुर, पोस्ट-कोतरी, ब्लाक-लोरमी, जिला-मुंगेली छत्तीसगढ़ से निशु बुनकर एक कविता सुना रही है उसका शीर्षक है : बलात्कारी
दिन का उजाला रात्रि का अंधकार है-
करके चीत्कार ऊँची स्वर में-
मैं रोती हूँ कि हो रहा बलात्कार है-
हमसे इस युग पर सच व् ईमानदारी का-
सत धर्मो के उसूलो का, हमारे संस्कारो का-
पारिवारिक मूल्यों का और हम-
कलयुग के अनगिनत बहीमूर्खो कुम्भकरण-
पाषाण जिगर लिए गली गली देख रहे है, देख रहे है...
