आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : हल्दी के फूल से पीलिया का इलाज

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी से पीलिया रोगी को कैसे हल्दी के पौधे से ठीक किया जा सकता है सुनते है विधि: हमारे आस पास बहुत सारे पेड़ पौधे होते है उन्ही में से हल्दी का पौधा है हल्दी के फूल को पीसकर चावल के पानी के साथ चूर्ण बनाकर खाली पेट तीन दिन तक पीए एक सप्ताह में पीलिया रोग दूर हो जायेगा. गन्ने को चूसकर उसका रस खाने से भी पीलिया रोग ठीक हो जाता है, चिरोठा के पत्ते को तोड़कर लाइए उसे सुखाकर उसे दाल के साथ टमाटर के साथ पकाइए उससे साँस की बीमारी एवं खून साफ़ होता है, ऐसे बहुत सारे पेड़ पौधे है हमारे आस पास हैं लेकिन जानकारी नही होने से हम उनका उपयोग नही कर पाते है, तो आप सुनते रहिये सीजीनेट। पडियारी@9981622548

Posted on: Mar 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार...होली कविता

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी होली को लेकर एक कविता सुना रहे है:
रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार-
आवों दोस्तों मिलजुलकर, जताए सबसे प्यार-
मन में हो जो बैर, भाव उसे भुला गये यार-
उनके गले डाल दे, अपना बाहों का हार-
गाये मिलजुलकर खुशी गीत-
बाजा, ढ़ोल नगाड़ा, नाचे झूम-झूम-
गाए भरत फागुन का त्यौहार-
साल में आता एक बार, लिए बसन्त बहार-
पेड़, पौधे भी नाच रहे देख, खुशी का त्यौहार-
भौरे गुन, गुन कर रहे, देख मधु की बहार-
आवो आँखे में आँखे डाल, युगल करे अपना इज़हार-
केसू पलाश में बाल लाली, आई मद, मस्त बहार....

Posted on: Mar 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

धरती कहे अम्बर से मुझे छूलो अपने मुकद्दर से...कविता-

कन्हैयालाल पडियारी ग्राम-तमनार जिला-रायगढ़ छत्तीसगढ़ से एक कविता सुना रहे हैं:
धरती कहे अम्बर से मुझे छूलो अपने मुकद्दर से-
मेरे पास समंदर हैं अपना प्यास बुझालो-
बादल बनके छा जाओं फिर बूँदे बनकर बरसो-
और धरती माता की प्यास बुझाओ-
तरस रही है धरती माता बूँदों की बौछार करो-
हरियाली राह देख रही हैं तुम्हारे आने की – पलके बिछाई उम्मीदों की दीप जलाकर-
पूरा करो दो उसकी तमन्ना जो भी कर सकते हो...

Posted on: Mar 08, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI

मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन उजाला रे...होली गीत

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक होली गीत सुना रहे है:
मेरा मन प्रेम पुजारी, मेरा मन उजाला रे,
कोई कहे काला रे, कोई कहे काला रे-
मेरा मन प्रेम पुजारी, कोई कहे नन्दलाला-
कोई कहे यशोदा बाला, कोई कहे प्रेम पुजारी,
कोई कहे दही चोर,कोई कहे, माखन चोर-
कोई कहे नन्द गोपाला, कोई कहे मथुरा वाला-
मेरा मन उजाला रे, मेरा मन उजाला रे-
कोई कहे गिरिधारी, कोई कहे बन्सीधारी-
मेरा मन उजाला रे, मेरा मन उजाला रे...

Posted on: Mar 06, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

कलम कमाई खाते है, नहीं लेते है घूस...व्यंग्य रचना

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक व्यंग्य रचना सुना रहे है:
कलम कमाई खाते हैं, नहीं लेते है घूस-
पान गुटखा खाकर हँसते रहते मुच-मुच-
अरे पाप पुण्य को कौन देखता है-
अभी तो कुछ कर दो-
बाद में कौन देखता है अभी तो घर भर लेने दो-
समय पल दो पल की मेहमाँ है-
उसे हाथ से न जाने दो-
अभी तो सुनहरा मौका है-
अपना जेब भर लेने दो...

Posted on: Mar 06, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER

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