रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार...होली कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी होली को लेकर एक कविता सुना रहे है:
रंग और गुलाल की आई खुशी का त्यौहार-
आवों दोस्तों मिलजुलकर, जताए सबसे प्यार-
मन में हो जो बैर, भाव उसे भुला गये यार-
उनके गले डाल दे, अपना बाहों का हार-
गाये मिलजुलकर खुशी गीत-
बाजा, ढ़ोल नगाड़ा, नाचे झूम-झूम-
गाए भरत फागुन का त्यौहार-
साल में आता एक बार, लिए बसन्त बहार-
पेड़, पौधे भी नाच रहे देख, खुशी का त्यौहार-
भौरे गुन, गुन कर रहे, देख मधु की बहार-
आवो आँखे में आँखे डाल, युगल करे अपना इज़हार-
केसू पलाश में बाल लाली, आई मद, मस्त बहार....
