आ गए रे अंतर राष्ट्रीय मेरे आठ मार्च को...

राजकुमार धुर्वे ग्राम काजरा तहसील लेहगड़वा जिला छिन्दवाड़ा (मप्र) से आज महिला दिवस पर एक गीत सुना रहे है
आ गए रे अंतर राष्ट्रीय मेरे आठ मार्च को
आठ मार्च को चन्दा भी आये और चाँद भी आये
गंगा भी आये और जमुना भी आये
भरी बरसात मै आ गये रे
राम भी आये और लखन भी आये
सीता भी संग लाये रे आ गये रे
कृष्णा भी आये और स्वामी भी आये
संग लाये रे राधा आ गये रे

Posted on: Mar 08, 2014. Tags: Rajkumar Dhurvey

घर घर अलख जगाएंगे हम, बदलेंगे जमाना...

घर घर अलख जगाएंगे हम, बदलेंगे जमाना
बदली है हमनें अपनी दिशाएँ
मंजिल नईं तय करके दिखाएँ
धरती को स्वर्ग बनाएंगे हम बदलेंगे जमाना
घर घर अलख जगाएंगे हम, बदलेंगे जमाना
सम से बनाएंगे माटी को सोना
सम तक दीप जलाएंगे बदलेंगे जमाना

Posted on: Mar 01, 2014. Tags: Santosh Kumar

मैं तुमको विश्वास दूँ तुम मुझको विश्वास दो...

मैं तुमको विश्वास दूँ तुम मुझको विश्वास दो
शंकाओ के सागर हम रंग जायेंगे
वसुंधरा को मिलकर स्वर्ग हम बनाएंगे
प्रेम दिन आया जीवन तो अंजाना है
सब अपने है कौन यहाँ बैगाना है
मै तुमको विश्वास...
हर पल अपना अर्थवान हो जाएगा
बस थोडा सा मन में प्यार जगाना है
इस जीवन को साज दो
मौन नहीं आवाज दो
भाषणो में मीठी प्यास जगाएंगे
वसुंधरा को मिलकर स्वर्ग बनाएंगे
मैं तुमको विश्वास...
अलगाओ से आग सुलगने लगती है
उपवन कि हर साक जुरंदने लगती है
मै तुमको विश्वास दूँ तुम मुझको विश्वास दो

Posted on: Feb 28, 2014. Tags: Santosh Kumar

ठगा ठगी का खेल चला है जन जन लुटता जाता है...

ठगा ठगी का खेल चला है जन जन लुटता जाता है
दे देकर धोखा ये कैसे हम को छलता जाता है
उपभोक्ता अब तुम जाग उठो नव प्रभात कि बेला है ,
उपभोक्ता तुम अब जाग उठो ,अब अपनी पहचान बनाना है
धोखा दे या करे मिलावट कम तौले या करे मिलावट
सोना चाँदी , मिर्च मशाला,कपडा लत्ता तक ठग डाला ,
चावल में जब कंकड़ डाला ,आते में जब भाटा मिल जाता ,
पलती मछली जग दूधो में खोआ में आलू मिल जाता
नाम किसी का दाम किसी का फिर भी बिकता जाता है ,
चमक दमक से आँखे चुंधियाई अँध्यारो में गिरता है
जाग जाग तू रे उपभोक्ता देख कहाँ तू जाता है

Posted on: Feb 24, 2014. Tags: Brijesh Kumar

गाछी में कुहके कोयलिया हो तनी होनका बोलाइ द...

अनीता कुमारी मुजफ्फरपुर , बिहार से वज्जिका भाषा में एक गीत गा रही हैं जिसका मतलब है – शादी होने के बाद नायक परदेश गया हैं नौकरी करने , सावन आ गया है पेड़ो में कोयल कू -कू करने लगी है , नायिका की सहेलियां हंसी ठिठोली कर रही हैं वक्त हो गया लेकिन वो अभी नहीं आए।
गाछी में कुहके कोयलिया हो तनी होनका बोलाइ द
सपना में देखली हम सइयां घर आइल
सइयां घर आइल हो सइयां घर आइल
फुसलावे लोत ननदोइया हो, तनी होनका...
अपने ही गोड़ में मरले टेंगारी
घर पे ना बइठे करइछे बेगारी
रात में डरावे अन्हरिया रे ,तनी होनका बोला द
गाछी में चमके ……।

Posted on: Feb 20, 2014. Tags: Anita Kumari

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