साथी के रान नईया रे मलाहा साथी ये सारे या...पारम्पारिक गीत
ग्राम पचायत-सुमेरा, प्रखंड-कुरेनी, जिला-मुजफ्फपरपुर (बिहार) से भोली देवी एक गीत सुना रही है:
साथी के रान नईया रे मलाहा साथी ये सारे या-
साथी एरा गानिया रे माला तोहर नायिये मासलिया-
सोनेकेरा नायिया ओ दिना नारे के सारे के सारेहा...
Posted on: Nov 03, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दारु झन पिबे यार मिट जाहि जिन्दगी के डेरा...शराब विरोधी गीत
ग्राम भेढिया, पोस्ट भेढिया, तहसील प्रतापपुर, जिला सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से साथी गोंडवाना राज कुमार पोया शराब से संबधित एक गीत सुना रहे हैं :
यही एक देश है, जहा का मालिक मजदूर है-
भक्ति साहस सब है, पर दारू पीकर मजबूर है-
...
दारु झन पिबे यार मिट जाहि जिन्दगी के डेरा-
दारू के करम हार मिट जाहि जिंदगी के डेरा-
मुह के भार पेड़ी ले महुआ गिरत हे-
वोसे गिराय दिही तोला-
दारु झन पिबे यार मिट जाहि जिन्दगी के डेरा-
महुआ लान के अंगना सुखाते-
वोसे सुखाय दिही तोला-
दारु झन पिबे यार मिट जाहि जिन्दगी के डेरा...
Posted on: Nov 02, 2016. Tags: GONDWANA RAJKUMAR SONG VICTIMS REGISTER
हे दुःख भंजन मारुती नन्दन सुन लो मेरी पुकार...आरती गीत
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से सुरेश यादव एक भजन सुना रहे हैं :
हे दुःख भंजन मारुती नन्दन सुनलो मेरी पुकार-
पवन सुत विनती बारम्बार-
अपरम्पार है शक्ति तुम्हारी-
दुखियों के तुम भाग्य विधाता-
रामभक्त मोहि शरण में ली जय-
भवसागर से तार-
पवन सुत विनती बारम्बार...
Posted on: Nov 02, 2016. Tags: SONG SURESH KUMAR YADAV VICTIMS REGISTER
जंगल का जब इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा: चिड़िया की कहानी
बहुत समय पहले की बात है भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के इलाको में ऋषि वाल्मीकि रहां करते थे वो लोगों को ज्ञान की बातें बताया करते थे । उनके शिष्यों के साथ-साथ एक छोटी चिड़िया भी उनके बात को बहुत ही ध्यानपूर्वक सुना करती थी एक बार की बात है की जंगल में आग लग गई और उसको देखकरमनुष्य के साथ साथ जीव जन्तु भी परेशान थे वो इधर उधर भाग रहे थे कुछ समझ में नही आ रहा था पास में नदी भी नही तालाब भी नही था उसके बावजूद एक छोटी चिड़िया दूर से अपने चोंच में पानी भर के लाती और आग पर छिड़कती यह देखकर मनुष्य और पशु ने छोटी चिड़ियाँ से कहा इस भयंकर आग तुम्हारी चोंच से लाया पानी से बुझ जायेगा ? छोटी चिड़ियाँ ने मनुष्य तथा पशु से बड़े विनम्रता पूर्वक कहा किमैं जानता हूं मेरे प्रयास से यह भयंकर आग नहीं बुझेगा परंतु जंगल का जब इतिहास लिखा जाएगा उस वक्त मेरा देखने वालो में नहीं बल्कि बुझाने वाला में होगा. सुनील@9308571702
Posted on: Nov 01, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी...दीपावली में कुम्हार पर कविता
मालीघाट, जिला- मुज्जफरपुर,राज्य बिहार से सुनील कुमार दीपावली के अवसर पर कुम्हार भाइयों पर आधारित चित्रा देसाई की एक कविता सुना रहे है :
कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी, चाक्ष परख मिटी-
हाथो में लपेटे गोल गोल घुमाती थी हमेशा एक सवाल-
सुराही मटके दिये, मिट्टी बनाती है ये हाथ-
नानी की वही हँसी और साफ जवाब-
न मिट्टी न हाथ, आग बनाती है सब-
सिंकती है मिट्टी तब ही तो बनती है-
वरना मिट्टी में घुली रहती जिसे आग परिपक्व बनाती है...

