कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी...दीपावली में कुम्हार पर कविता
मालीघाट, जिला- मुज्जफरपुर,राज्य बिहार से सुनील कुमार दीपावली के अवसर पर कुम्हार भाइयों पर आधारित चित्रा देसाई की एक कविता सुना रहे है :
कुम्हार के घर से खेतो में जाती थी, चाक्ष परख मिटी-
हाथो में लपेटे गोल गोल घुमाती थी हमेशा एक सवाल-
सुराही मटके दिये, मिट्टी बनाती है ये हाथ-
नानी की वही हँसी और साफ जवाब-
न मिट्टी न हाथ, आग बनाती है सब-
सिंकती है मिट्टी तब ही तो बनती है-
वरना मिट्टी में घुली रहती जिसे आग परिपक्व बनाती है...

